प्रफुल्ल चाकी

1 मई/बलिदान दिवस प्रफुल्ल चाकी प्रफुल्ल का जन्म 10 दिसम्बर 1888 को उत्तरी बंगाल के बोगरा जिला (अब बांग्लादेश में स्थित) के बिहारी गाँव में हुआ था। जब प्रफुल्ल दो वर्ष के थे तभी उनके पिता जी का निधन हो गया। उनकी माता ने अत्यन्त कठिनाई से प्रफुल्ल का पालन-पोषण किया। विद्यार्थी जीवन में ही … Read more

1 मई : श्रमिक दिवस — मेहनतकश हाथों को सम्मान देने का दिन

1 मई : श्रमिक दिवस — मेहनतकश हाथों को सम्मान देने का दिन हर वर्ष 1 मई को पूरी दुनिया में “अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस” या “मई दिवस” मनाया जाता है। यह दिन उन करोड़ों मजदूरों और श्रमिकों को समर्पित है, जिनकी मेहनत से समाज, उद्योग, कृषि, निर्माण और देश की अर्थव्यवस्था चलती है। श्रमिक किसी … Read more

यह कविता नहीं, यह चार्जशीट है…

यह कविता नहीं, यह चार्जशीट है… Sudhir Dhawale बैंक के दरवाज़े पर आज कोई ग्राहक नहीं आया आज एक सवाल आया है उसके हाथ में पासबुक नहीं एक कंकाल है वो फॉर्म नहीं भर सकता वो हस्ताक्षर नहीं कर सकता पर उसने इतिहास पर एक गाढ़ा निशान बना दिया है हड्डियों से कब्र की मिट्टी … Read more

करुणा की देवी श्री श्री मां आनंदमयी

30 अप्रैल/जन्म-दिवस करुणा की देवी श्री श्री मां आनंदमयी भक्ति, प्रेम और करुणा की त्रिवेणी श्री श्री मां आनंदमयी एक महान आध्यात्मिक विभूति थीं। उनका जन्म 30 अप्रैल, 1896 (वैशाख पूर्णिमा) को त्रिपुरा के खेड़ा ग्राम में अपनी ननिहाल में हुआ था। अब यह गांव बांग्लादेश में है। उनका बचपन का नाम निर्मला सुंदरी था। … Read more

दुनिया में सैन्य खर्च बढ़ा, भारत पांचवें स्थान पर(स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिपरी) की ताजा रिपोर्ट-2025)

दुनिया में सैन्य खर्च बढ़ा, भारत पांचवें स्थान पर(स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिपरी) की ताजा रिपोर्ट-2025) -सुनील कुमार महला दुनिया के देश अपने रक्षा बजट या यूं कहें कि सैन्य खर्च में अभूतपूर्व बढ़ोत्तरी कर रहे हैं। वास्तव में, आज के समय में दुनिया भर में सैन्य खर्च कई कारणों से तेजी से बढ़ रहा … Read more

चीणी ल्यायो

चीणी ल्यायो पच्चीस की जिगां भी तीस घरहाली पकड़ाई घरहाले न रासन ल्याणे की लिष्ट पढ़तांई घरहालो बावलो हुयो चीणी लिखी थी पांच किल्लो की जिंगा पच्चीस । बोलतांई बणियाणी भड़की अर बोली ढ़ाई किलो लांयां भी होसी बस घर मं केरी अर आम मती लाया बदली मांय मतीरो ही खाया । भूल जाया केरी … Read more

समाज  संगठित  हो

समाज  संगठित  हो इकट्ठा होकर एक साथ रहना ही समाज कहलाता है। जबतक हम बिखरे रहेंगे तबतक उत्थान से पिछड़े रहेंगे अर्थात जबतक हम जाति – प्रजाति, भाषा,अमीरी- गरीबी, ऊँच – नीच, स्वार्थी विचार वाले मतभेदों मे बंटे रहेंगे तबतक  समाज मे हमारा उचित महत्व नही मिल पाएगा। पूरी तरह से संगठित होकर एकत्व भाव … Read more

हिल्टन होटल में गोलीबारी-निंदनीय और अफसोसजनक: शांति, सौहार्द और संवाद की टेबल पर वार्ता से ही सबकुछ संभव !

हिल्टन होटल में गोलीबारी-निंदनीय और अफसोसजनक: शांति, सौहार्द और संवाद की टेबल पर वार्ता से ही सबकुछ संभव ! -सुनील कुमार महला शनिवार 25 अप्रैल 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति की मौजूदगी में हिल्टन होटल में आयोजित रात्रिभोज कार्यक्रम के दौरान एक व्यक्ति द्वारा की गई गोलीबारी वास्तव में बहुत चिंता का विषय है।कितनी बड़ी बात … Read more

कांगला दुर्ग का पतन

27 अप्रैल/इतिहास-स्मृति कांगला दुर्ग का पतन 1857 के स्वाधीनता संग्राम में सफलता के बाद अंग्रेजों ने ऐसे क्षेत्रों को भी अपने अधीन करने का प्रयास किया, जो उनके कब्जे में नहीं थे। पूर्वोत्तर भारत में मणिपुर एक ऐसा ही क्षेत्र था। स्वाधीनता प्रेमी वीर टिकेन्द्रजीत सिंह वहां के युवराज तथा सेनापति थे। उन्हें ‘मणिपुर का … Read more

समाज  संगठित  हो

समाज  संगठित  हो इकट्ठा होकर एक साथ रहना ही समाज कहलाता है। जबतक हम बिखरे रहेंगे तबतक उत्थान से पिछड़े रहेंगे अर्थात जबतक हम जाति – प्रजाति, भाषा,अमीरी- गरीबी, ऊँच – नीच, स्वार्थी विचार वाले मतभेदों मे बंटे रहेंगे तबतक  समाज मे हमारा उचित महत्व नही मिल पाएगा। पूरी तरह से संगठित होकर एकत्व भाव … Read more