कहानी

आस पास के किसी गाँव में कॉलेज न होने से मुझे पढ़ने के लिए में शहर आना पड़ा । यहां किसी रिश्तेदार का एक कमरे का बिना किराये का मकान मिल गया था। आस-पास निर्धन लोगो के घर थे। यहां अकेले होने के कारण सारे काम मुझे खुद ही करने पड़ते थे। खाना-बनाना, कपड़े धोना, … Read more

इतिहास के पन्नों में 07 जुलाईः विश्व क्रिकेट में भारत के माही का नाम ही काफी है (07 July in the pages of history)

श-दुनिया के इतिहास में 07 जुलाई की तारीख तमाम अहम वजह से दर्ज है। इस तारीख का रिश्ता सफल भारतीय क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी से है। झारखंड की राजधानी रांची के एक परिवार में 07 जुलाई, 1981 को जन्मे महेंद्र सिंह धोनी ने अपनी योग्यता और जुझारूपन से विश्व क्रिकेट में एक अनूठा मुकाम हासिल … Read more

महंगाई की मार: आम जनता लाचार–अशोक भाटिया

देश में महंगाई की मार से आम जनता परेशान है. सब्जियों के दाम में भी कमी और उछाल का दौर जारी है. चावलों के दाम बढ़ने के बाद सरकार ने चावलों के निर्यात पर बैन लगा दिया था. जिसके बाद चावल की कीमत तो नियंत्रण में आ गई. लेकिन अन्य वस्तुओं के दाम बढ़ते जा रहे हैं. अभी … Read more

स्वामी विवेकानन्द: विश्व को आध्यात्मिक ज्ञान और सामाजिक सुधार से प्रेरित करना— डॉ प्रग्नेश परमार

आध्यात्मिक विभूति और भारतीय इतिहास के एक प्रमुख व्यक्ति स्वामी विवेकानन्द का जन्म 12 जनवरी, 1863 को कोलकाता, भारत में हुआ था। उनके जीवन और शिक्षाओं ने दुनिया पर एक अमिट छाप छोड़ी है, जिससे लाखों लोगों को आंतरिक विकास, सामाजिक सुधार और सार्वभौमिक भाईचारे की प्रेरणा मिली है। यह लेख समाज और आध्यात्मिकता पर स्वामी विवेकानन्द के जीवन, दर्शन और प्रभाव की पड़ताल करता है। प्रारंभिक जीवन और आध्यात्मिक खोज: एक पारंपरिक हिंदू परिवार में जन्मे, नरेंद्र नाथ दत्त, जैसा कि उन्हें शुरू में जाना जाता था, ने असाधारण बुद्धिमत्ता के शुरुआती लक्षण और आध्यात्मिक सत्य के लिए गहरी लालसा दिखाई। उनकी जिज्ञासु प्रकृति और अस्तित्व के सार का पता लगाने की इच्छा ने उन्हें उस समय के प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरुओं से मार्गदर्शन लेने के लिए प्रेरित किया। श्री रामकृष्ण परमहंस के मार्गदर्शन में ही युवा नरेंद्र नाथ की आध्यात्मिक यात्रा शुरू हुई। श्री रामकृष्ण की उपस्थिति में, नरेंद्र नाथ में गहरा आध्यात्मिक परिवर्तन हुआ। उन्हें धर्मों की सार्वभौमिकता की अवधारणा से परिचित कराया गया, यह मानते हुए कि सभी धर्म एक ही अंतिम सत्य की ओर ले जाते हैं। उनके गुरु की शिक्षाओं ने उनमें मानवता के प्रति करुणा और सेवा की गहरी भावना पैदा की। शिकागो पता और वैश्विक मान्यता: स्वामी विवेकानन्द की सबसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक उपस्थिति 1893 में शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद में थी। हिंदू धर्म का प्रतिनिधित्व करते हुए, उन्होंने अपने शुरुआती शब्दों, “अमेरिका की बहनों और भाइयों” से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया, जिसने सार्वभौमिक भाईचारे का राग अलापा। उनके ओजस्वी और प्रेरक भाषण ने सभी धर्मों और संस्कृतियों की स्वीकृति और सम्मान पर जोर दिया, जिससे वैश्विक मंच पर स्थायी प्रभाव पड़ा। स्वामी विवेकानन्द ने अपने ओजस्वी सम्बोधन से विश्व को भारतीय अध्यात्म एवं दर्शन की समृद्धि से परिचित कराया। उन्होंने सहिष्णुता, सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व और प्रत्येक मनुष्य में देवत्व की पहचान के विचार पर जोर दिया। उनका गहन ज्ञान सांस्कृतिक बाधाओं को पार कर विविध पृष्ठभूमि के लोगों के बीच गूंजता रहा। दर्शन और शिक्षाएँ: स्वामी विवेकानन्द की शिक्षाएँ वेदांत दर्शन, आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि और दैनिक जीवन के लिए व्यावहारिक अनुप्रयोगों का सामंजस्यपूर्ण मिश्रण थीं। उन्होंने व्यक्तियों को अपने भीतर परमात्मा की तलाश करने और अपनी जन्मजात क्षमता को पहचानने के लिए प्रोत्साहित किया। उनके दर्शन के कुछ प्रमुख सिद्धांतों में शामिल हैं: एकता: स्वामी विवेकानन्द ने सभी अस्तित्वों की एकता पर जोर दिया, उन्होंने अंतर्निहित एकता को देखा जो हर जीवित प्राणी को बांधती है। उनका मानना था कि इस अहसास से अधिक दयालु और समावेशी समाज का निर्माण हो सकता है। आत्म-साक्षात्कार: उन्होंने आत्म-साक्षात्कार का महत्व सिखाया, शरीर और मन की सीमाओं से परे किसी के वास्तविक स्वरूप को समझना। उनके अनुसार, आत्म-साक्षात्कार, सच्ची मुक्ति और पूर्णता की ओर ले जाता है। मानवता की सेवा: स्वामी विवेकानन्द “दरिद्र नारायण” की अवधारणा में विश्वास करते थे – गरीबों और पीड़ितों में भगवान को देखना। उन्होंने निस्वार्थ सेवा के महत्व पर जोर दिया और इसे आध्यात्मिक विकास का साधन माना। निडरता और शक्ति: उन्होंने व्यक्तियों को सत्य की खोज में निडर होने और जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए आंतरिक शक्ति विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया। समाज पर प्रभाव: भारतीय समाज पर स्वामी विवेकानन्द का प्रभाव गहरा था। उनकी शिक्षाओं और आदर्शों ने सामाजिक और आध्यात्मिक जागृति पैदा की। उन्होंने जातिगत भेदभाव जैसी सामाजिक बुराइयों के उन्मूलन और शोषितों और वंचितों के उत्थान की वकालत की। 1897 में स्थापित रामकृष्ण मिशन और रामकृष्ण मठ के माध्यम से स्वामी विवेकानन्द की शिक्षाओं को व्यवहार में लाया गया। ये संगठन शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और मानवीय सहायता के क्षेत्रों में अथक रूप से काम कर रहे हैं, जिससे समाज पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ रहा है। विरासत और वैश्विक प्रभाव: स्वामी विवेकानन्द की शिक्षाएँ सीमाओं और संस्कृतियों से परे, दुनिया भर के लोगों के बीच गूंजती रहती हैं। सद्भाव, सहिष्णुता और सत्य की खोज के उनके संदेश ने अनगिनत व्यक्तियों को उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने और समाज की भलाई के लिए काम करने के लिए प्रेरित किया है। महात्मा गांधी, रवींद्रनाथ टैगोर और जवाहरलाल नेहरू जैसी प्रमुख हस्तियों पर उनके प्रभाव ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम और एक अधिक समावेशी और प्रगतिशील समाज की यात्रा में एक मार्गदर्शक शक्ति के रूप में उनकी जगह को और मजबूत किया। स्वामी विवेकानन्द का जीवन और शिक्षाएँ आध्यात्मिक विकास और सामाजिक सुधार चाहने वाले लोगों के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन का एक शाश्वत स्रोत बनी हुई हैं। उन्होंने इस विचार का उदाहरण दिया कि आध्यात्मिकता और मानवता की सेवा अविभाज्य हैं। अपने गहन ज्ञान और दूरदर्शिता के माध्यम से, वह पीढ़ियों को प्रेरित करते हैं, एक ऐसी दुनिया को बढ़ावा देते हैं जहां करुणा, एकता और सत्य की खोज सभी के लिए एक उज्जवल और अधिक सामंजस्यपूर्ण भविष्य की ओर ले जाती है। — Dr. Pragnesh B. Parmar MBBS, MD (Forensic Medicine), GSMC-FAIMER, PGDHL, AMAHA, ACME Additional Professor & HOD Department of Forensic Medicine and Toxicology All India Institute of Medical Sciences (AIIMS), Bibinagar Hyderabad Metropolitan … Read more

नफरतों, कड़वाहटों और संवादहीनता का समय! -सार्थक संवाद की दृष्टि से निराशाजनक रहा लोकसभा का पहला सत्र –प्रो.संजय द्विवेदी

भारतीय संसद अपनी गौरवशाली परंपराओं, विमर्शों और संवाद के लिए जानी जाती है। प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने लोकतांत्रिक बहसों को प्रोत्साहित किया और अपने प्रतिपक्ष के नेताओं डा.राममनोहर लोहिया, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर पीलू मोदी तक को मुग्ध भाव से सुना। राष्ट्र प्रेम ऐसा कि चीन युद्ध के बाद … Read more

समाज ले ऐसी करवट

यह कैसा सत्संग , जहां सैकड़ों लोग , कुचल कर मर जायेँ , मृत्यु की भेंट चढ़ जायेँ । यह कैसा पाखंड , जहां चरण रज , कालरज अन्त्येष्टि बन जाये , सबकी सांस उखड़ जाये । यह कैसा कथा प्रवचन , ‘भोले बाबा’ बन कर प्रवंचन , ‘साकार विश्वहरि’ बन कर , गरीब वंचितों का शोषण , लेकर भोलेनाथ का सहारा , ठग … Read more

समाज को चिंता करनी चाहिए ,,     बडी उम्र की कुँवारी लड़कियाँ घर बैठी हैं ??

अगर अभी भी माँ-बाप नहीं जागे तो स्थितियाँ और विस्फोटक हो सकती हैं।  समाज आज बच्चों के विवाह को लेकर इतना सजग हो गया है कि आपस में रिश्ते ही नहीं हो पा रहे हैं। समाज में आज 27-28-32 उम्र तक की बहुत सी कुँवारी लडकियाँ घर बैठी हैं क्योंकि इनके सपने हैसियत से भी … Read more

मेरे लिए दोस्ती से बढ़कर मां-बाप है

सुहाग सेज पर लाज से सिकुड़ी सिमटी बैठी दुल्हन का घूँघट उठाते ही क्षितिज का दिल धक् से रह गया,’अरे ये तो वही है…विजय की प्रेमिका… ये कैसी ग़लती हो गई उससे’? उसकी दीदी ने सौम्या की सूरत और सीरत की इतनी प्रशंसा की थी कि उसने कह दिया ,”अगर आपको पसंद है तो मुझे … Read more

चेन्नई के स्कूल द्वारा गर्मी की छुट्टियों में प्रेरणादायक असाइनमेंट

चेन्नई के एक स्कूल ने अपने बच्चों को छुट्टियों का जो एसाइनमेंट दिया वो पूरी दुनिया में वायरल हो रहा है। कारण बस इतना कि उसे बड़े सोच समझकर बनाया गया है। इसे पढ़कर अहसास होता है कि हम वास्तव में कहां आ पहुंचे हैं और अपने बच्चों को क्या दे रहे हैं। अन्नाई वायलेट … Read more

मां-बाप से अलग रहना सही नहीं

मेरा मानना था, कि पत्नी के साथ प्रेम वासना और उसकी सभी जरूरत यदि मैं पूरा करूं तो जीवन अच्छे से कटेगा और मैं पूरी तरह से तैयार था विवाह करने के लिए मैं मेरा खुद का व्यापार है, तो मुझे ऐसी लड़की चाहिए थी, जो स्मार्ट हो व्यापार में मेरा काम सम्भाल सके, १० … Read more