मानवता कराह रही है
कहीं गर्मी से तो कहीं पानी से पृकृति कहर ढा रही है अपने पङोसी देश में मानवता कराह रही है क्या कसुर इन मासुमो का ना किसी से लेना देना खाये दो समय रोटी वो भी छीनी जा रही है मानवता कराह रही है नारी का गहना अस्मत सरे आम लूटी जा रही है जला … Read more