क्या भारत विश्व की तीसरी आर्थिक शक्ति एवं महिला पांचवा सतंभ बनेगी?–मदन सुमित्रा सिंघल

देश उङान भर रहा है आज विश्व की पांचवी आर्थिक शक्ति है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 2029 तक विश्व की तीसरी आर्थिक शक्ति वाला देश बन जायेगा। यदि ऐसा होता है तो भारत का भविष्य स्वर्णिम होगा। विकसित एवं पल्लवित भारत आज भी विश्व का हर क्षेत्र में नेतृत्व कर रहा है। चीन … Read more

हर भारतीय के जुबान पर अमर रहेगी हिंदी भाषा

कश्मीर के पर्वतों से जो नदिया बहकर, कन्याकुमारी के तट पर जब लहरों के रूप में टकराती हो, उसी समय जल के टकराने के आवाजों में जैसे, हिंदी की बोली, स्वर एवं सुर गूंजती हो। तट पर पड़े बालू के एक एक कण जैसे इस मधुर जल से स्नान करती हो। समुंदर का तट अगर … Read more

किसी समाचार पत्र का बंद होना, समाज का बहुत बड़ा नुकसान –मदन सुमित्रा सिंघल

एक अखबार का बंद होना हजारों शुभचिन्तको एवं पाठकों के लिए बङा हादसा माना जा सकता है। इसके लिए इसका दोष प्रकाशक यानि स्वत्वाधिकारी का ही होता है लेकिन जब वो पर्याप्त मात्रा में धन का जुगाड़ ना कर सके व बार बार लोगों को निवेदन करें तो उस पर समर्थवान लोगों को संज्ञान लेना … Read more

क्यों मनाया जाता है हिंदी दिवस?

हर साल 14 सितंबर को मनाया जाने वाला हिंदी दिवस, भारत की करोड़ों की आबादी को जोड़ने वाली भाषा के प्रति सम्मान और गर्व का प्रतीक है। हिंदी सिर्फ एक भाषा नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक विरासत और एकता का प्रतीक भी है। इसलिए हिंदी दिवस का एक खास महत्व है और इसे … Read more

कार्यक्रम का संचालन महत्वपूर्ण दायित्व कठोरता के साथ विनम्रता आवश्यक

नियमन कार्यक्रम निर्धारित समय में शुरू होता है तथा निश्चित अवधी में समापन करना होता है इसलिए कार्यक्रम का संचालन बहुत ही शालीनता किंतु कठोर होकर सूची के साथ शुरू करना चाहिए। कुछ पंक्तियों से कार्यक्रम शुरू करना चाहिए लेकिन शेरों शायरी हास परिहास उनका परिचय तब तक कर लेना चाहिए जब तक वो मंच … Read more

गिरमिट’ देशों में हिन्दी के ध्वजावाहक डॉ दीप्ति अग्रवाल

दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा सम्पन्न शोध के दौरान मुझे गिरमिट देशों जैसे सूरीनाम, त्रिनिदाद एंड टोबैगो, गयाना और मॉरीशस की यात्रा का मौका मिला। यहाँ रह कर मुझे पता लगा कि इन देशों में भारतीय मूल के लोग आज भी भारतीय संस्कृति, भाषा को सँजो रहे हैं और जैसे विदेश में भी इन्होंने छोटे-छोटे भारत बसा … Read more

काम पङने पर घिघयाते है काम निकल जाने पर सरक जाते हैं धिक्कार है ऐसे लोग

स्वार्थ शब्द बना है तो अपनी स्वार्थ शक्ति का इस्तेमाल करने के बाद अपनी डायरी में नोट कर लेवें कि अमुक व्यक्ति ने मेरा ऐसा किया तो ईश्वर प्रदत मैं भी मनुष्य योनि में आया हूँ अवश्य ही कभी ना कभी उऋण होना चाहुंगा लेकिन यहाँ तो मतलब निकल गया कि जानते नहीं यूँ जा … Read more

सार्वजनिक जीवन में मर्यादा आवश्यक है।

जिस प्रकार किसी को मनचाही स्पीड में गाड़ी चलाने का अधिकार नहीं है, क्योंकि रोड सार्वजनिक है। ठीक उसी प्रकार किसी भी लड़की को मनचाही अर्धनग्नता युक्त वस्त्र पहनने का अधिकार नहीं है क्योंकि जीवन सार्वजनिक है। एकांत रोड में स्पीड चलाओ, एकांत जगह में अर्धनग्न रहो। मगर सार्वजनिक जीवन में नियम मानने पड़ते हैं। … Read more

हिंदी माह में सजने लगी संगठनों की दुकानें सालभर अतापता नहीं–मदन सुमित्रा सिंघल

यह विचित्र विडंबना है कि आजादी के बाद हर देश का झंडा संविधान एवं राष्ट्रीय भाषा एक होती है लेकिन घोषित राष्ट्रीय भाषा तो हिंदी जरूर है लेकिन हिंदी माह सप्ताह पखवाड़ा एवं हिंदी दिवस एक सालाना त्यौहार की मनाया जाता है। हिंदी संगठनों द्वारा सालभर कोई अतापता नहीं होता कि वो क्या कर रहे … Read more

शिवसागर कांड में समाज के नाम एक खुला पत्र – डॉ. अजय अग्रवाल

किसी कवि ने कहा है कौन कहता है कि आसमां में छेद नहीं हो सकता जरा एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो परंतु यहां एक बात‌आती है कि कौन पहल करेगा? समाज क्या है? हम और आप ? किससे समाज बना है? किससे संस्था है? कौन है जो समाज का सफल नेतृत्व कर सकता … Read more