झुठों की मंडली बनी कमंडली खोदा पहाड़ निकली चुहिया ( व्यंग)– मदन सुमित्रा सिंघल

जिसके पास अनुभव त्याग तपस्या समसरसता पार्दर्शिता इमानदारी हो उसे जगह जगह ना तो भटकना पङता ना ही रुकना एवं अटकना पङता। अपने आप उंट पहाड़ के नीचे आकर समर्पण कर देता है कि मैं यों ही अहंम भ्रम झूठ फरेब तानाशाही चापलुसों से घिर कर थूक बिलोलता रहा अपने अस्तित्व राजशाही एवं प्रतिष्ठा को … Read more

बढ़ती संस्था एवं निष्क्रिय संस्था दोनों ही समाज पर बोझ – मदन सुमित्रा सिंघल

जब जब कोई संस्था निष्क्रिय होती है तब तब समाज में बगावत के सुर उबरना, मौन विरोध, सपष्ट विरोध एवं षड्यंत्र के साथ विरोध होना स्वाभाविक है। ऐसा समाज में होना घातक होने के बावजूद लोगों में जागरुकता आती है। ऐसे भी लोग होते हैं जो चंदा भी देते हैं, समाज के निमंत्रण पर ऐन … Read more

धधक रहा है मणिपुर … बुझाए कौन   – राधा रमण 

मणिपुर में हिसा की मौजूदा घटना कोई नया नहीं है। पिछले डेढ़ साल (566 दिन) से यह प्रदेश हिंसा की लपटों में धधक रहा है और केंद्र तथा राज्य की सरकार मौन ओढ़े हुए हैं। सरकारी आँकड़ों पर भरोसा करें तो छोटे से उस राज्य में हिंसा की घटनाओं में अबतक 220 लोगों की जान … Read more

सुनिए, प्रेरणा भारती की पुकार

आप सही सोच रहे हैं? आपके सहायता के बिना प्रेरणा भारती नहीं चल पाएगी, सभी के सहयोग की जरूरत है। बिंदु बिंदु से सिंधु बना है। पिछले 21 वर्षों से आप सभी के सहयोग के बलबूते प्रेरणा भारती की यात्रा जारी है, कृपया अपनी सहायता का हाथ प्रेरणा भारती के लिए आगे बढ़ाएं, प्रेरणा भारती … Read more

महापुरुषों के जन्मोत्सव एवं पुण्यतिथि उसी दिन मनानी चाहिए अपनी सुविधा से नहीं

व्यस्त व्यक्ति एवं एक से अधिक संस्था का मुख्य पदाधिकारी ना तो बनना चाहिए ना ही सदस्यों को बनाना चाहिए। ऐसा होने से व्यस्त व्यक्ति अपनी सुविधा के अनुसार बिना सहमति बिना नियम बिना तारीख ताबड़तोड़ सभा करता है जबकि साधारण एवं आमसभा पंद्रह दिन पहले सूचना देकर सात दिन बाद रिमाइंडर देने के बाद … Read more

भवन निर्माण की जगह संभ्रांत नागरिक निर्माण पर बल देना उचित– मदन सुमित्रा सिंघल

इतिहास गवाह है कि हजारों बिघा जमीन अकुत संपत्ति माँ बाप बनाकर चले गए लेकिन निक्कमी पथभ्रष्ट एवं दुराचारी औलाद ने शराब सवाब एवं कबाब में सारी संग्रहित संपत्ति होम करदी। उस समय शिक्षा की बजाय बाजूबल, संपन्नता यश वैभव का बोलबाला था। छोटे छोटे राजा नबाब अपनी सीमा रूतबा एवं एश्वर्य बढाने के लिए … Read more

दिन में शादी ना धन की बरबादी साथ में शास्त्र संपन्न अपनायें बंधुगण

देखा देखी में हम अपनी संतान की शादी अधिक से अधिक कार्यक्रमों के साथ इस व्यस्ततम युग में करते हैं। यह कोई नयी परंपरा नहीं है। शदियों से सवा महीने पहले गीत गाना, घर में कच्चे मकानों की लिपापोती रंगरोगन करना दर्जी से कपड़े सिलवाना बेटियों एवं अन्य महिला रिश्तेदार को जाकर लाना सहित अनेक … Read more

मान सम्मान वंचित उपेक्षित ऐसे सितारों का करें जिन्होंने जमीनी काम किया– मदन सुमित्रा सिंघल

हर समाज अपने अपने तरिके से परंपरागत कमोबेश अपने त्यौहार मनाने युगपुरुसों की जन्मजयंती मनाने के साथ साथ होली दिवाली मिलन के अलावा जनहित के लिए भी अपनी क्षमता एवं भक्ति के अनुसार काम करते हैं इससे उनके शहर के लोगों को विशेषकर गरीब एवं जरूरत मंद लोगों को राहत मिलती है। प्याऊ परंपरा अग्रवाल समाज … Read more

“प्रभाव की विरासत: असम की राजनीति में गुवाहाटी विश्वविद्यालय की भूमिका और ABVP की छात्र संघ चुनाव में ऐतिहासिक जीत”

असम के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. गोपीनाथ बरदलै सरकार के तत्वाधान में एवं उनके स्वप्न स्वरूप पूर्वोत्तर भारत का प्रथम एवं  सबसे बड़ा विश्विद्यालय गौहाटी विश्विद्यालय की स्थापना 26 जनवरी 1948 यानि देश की  आजादी के छः महीनों के भीतर होती है,जिसके संस्थापक कुलपति के रूप में संस्कृत के प्रकांड विद्वान,विचारक एवं समाजसेवी प्राध्यापक कृष्ण कांत … Read more

मोदी और मोहन के नेतृत्व में खुशहाली के पथ पर  अग्रसर मध्यप्रदेश- (सुरेश पचौरी- विनायक फीचर्स)     

 हम मध्यप्रदेश का 69 वां स्थापना दिवस मना रहे हैं। भारत का हृदय कहा जाने वाला मध्यप्रदेश एक नवम्बर 1956 को अस्तित्व में आया, जिसका गठन तत्कालीन मध्यभारत, विंध्य प्रदेश, भोपाल रियासत तथा महाकौशल के कुछ हिस्से को एकीकृत कर किया गया था। प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर तथा झीलों की नगरी कहे जाने वाले भोपाल … Read more