झुठों की मंडली बनी कमंडली खोदा पहाड़ निकली चुहिया ( व्यंग)– मदन सुमित्रा सिंघल
जिसके पास अनुभव त्याग तपस्या समसरसता पार्दर्शिता इमानदारी हो उसे जगह जगह ना तो भटकना पङता ना ही रुकना एवं अटकना पङता। अपने आप उंट पहाड़ के नीचे आकर समर्पण कर देता है कि मैं यों ही अहंम भ्रम झूठ फरेब तानाशाही चापलुसों से घिर कर थूक बिलोलता रहा अपने अस्तित्व राजशाही एवं प्रतिष्ठा को … Read more