किसानों की मेहनत पर फिरा पानी, मुआवजे की मांग को लेकर सैकड़ों किसान लामबंद।
चंद्रशेखर ग्वाला लखीपुर। 2 नवंबर।
कछार जिले के लखीपुर विधानसभा क्षेत्र में भारतमाला परियोजना के तहत सड़क निर्माण कार्य के दौरान मिट्टी भराई से उत्पन्न जलजमाव और मिट्टी धंसने की घटना ने किसानों के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। आरोप है कि सड़क निर्माण के लिए पहाड़ी काटकर निचले इलाके में मिट्टी भराई किए जाने के कारण करीब 100 बीघा कृषि भूमि बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। इससे धान की फसल पूरी तरह बर्बाद होने का दावा किया जा रहा है। इस घटना से प्रभावित किसानों के सामने आजीविका का संकट उत्पन्न हो गया है। सैकड़ों किसान उचित मुआवजे की मांग को लेकर आवाज उठा रहे हैं।
यह घटना कछार जिले के लखीपुर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत पयलापुल ग्राम पंचायत के लाबकपर तृतीय एवं चतुर्थ खंड में हुई है। शिलचर से जिरीघाट तक भारतमाला परियोजना के तहत सड़क निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, लाबकपार इलाके में पहाड़ी काटकर निकाली गई मिट्टी से निचले हिस्से को भरकर सड़क का निर्माण किया गया था। आरोप है कि मिट्टी भराई के कारण सड़क के एक ओर पानी जमा होने लगा और धीरे-धीरे वहां विशाल तालाब जैसी स्थिति बन गई। इससे आसपास की कृषि भूमि जलमग्न हो गई। साथ ही निकटवर्ती टीलों पर लगे कीमती पेड़-पौधों के भी नष्ट होने की बात सामने आई है।
स्थानीय किसानों का कहना है कि उन्होंने काफी पहले ही इस संभावित खतरे को भांप लिया था। जल निकासी की व्यवस्था नहीं होने के कारण भविष्य में कृषि भूमि के जलमग्न होने की आशंका जताते हुए किसानों ने भारतमाला परियोजना के जिम्मेदार ठेकेदार से बार-बार वहां कल्वर्ट निर्माण की मांग की थी, ताकि जमा पानी आसानी से बाहर निकल सके। हालांकि, आरोप है कि ठेकेदार कंपनी ने उनकी मांग को गंभीरता से नहीं लिया और कल्वर्ट निर्माण की व्यवस्था नहीं की।
आखिरकार किसानों की आशंका सच साबित हुई। कुछ महीने पहले हुई भारी बारिश के दौरान जमा पानी का दबाव बढ़ गया। अचानक मिट्टी भराई वाला हिस्सा फट गया और पानी के तेज बहाव के साथ मिट्टी एवं पत्थर नीचे की ओर बहने लगे। इस प्राकृतिक और निर्माण संबंधी आपदा के कारण करीब 100 बीघा कृषि भूमि में लगी धान की फसल पूरी तरह तबाह हो गई।
प्रभावित किसानों ने बताया कि लाबकपार तृतीय एवं चतुर्थ खंड के अधिकांश परिवार कृषि पर निर्भर हैं। कई किसानों ने बैंक एवं अन्य स्रोतों से कृषि ऋण लेकर धान की खेती की थी। फसल तैयार होने के बाद उसे बेचकर परिवार का खर्च चलाने और ऋण चुकाने की उम्मीद थी। लेकिन सड़क निर्माण में कथित लापरवाही के कारण उनकी महीनों की मेहनत पर पानी फिर गया।
किसानों का आरोप है कि इस संबंध में कुछ दिन पहले लखीपुर सह-जिला आयुक्त कार्यालय तथा स्थानीय कृषि विभाग को जानकारी दी गई थी, लेकिन अब तक न तो कोई ठोस कार्रवाई हुई है और न ही प्रभावित किसानों को मुआवजा मिला है।
न्याय और मुआवजे की मांग को लेकर प्रभावित किसानों ने असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा, कृषि मंत्री पीयूष हजारिका तथा लखीपुर के स्थानीय विधायक एवं राज्य सरकार के मंत्री कौशिक राय का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित किया है।
किसानों की मांग है कि संबंधित विभागीय अधिकारी तत्काल घटनास्थल का निरीक्षण कर नुकसान का वास्तविक आकलन करें। साथ ही, निर्माण कार्य में कथित लापरवाही की जांच कर दोषियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाए और प्रभावित किसानों को शीघ्र उचित मुआवजा प्रदान किया जाए।
अब देखना यह है कि किसानों की इस गंभीर समस्या पर प्रशासन और संबंधित विभाग कब तक ठोस कदम उठाते हैं तथा पीड़ित किसानों को कब न्याय और राहत मिलती है।