अशोक सिंघल जन्मशताब्दी वर्ष का शिलचर में शुभारंभ, 35 कारसेवकों को किया गया सम्मानित

शिलचर। विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख संगठनकर्ताओं में से एक स्वर्गीय अशोक सिंघल की जन्मशताब्दी के अवसर पर रविवार को सिलचर में वर्षव्यापी कार्यक्रमों का औपचारिक शुभारंभ किया गया। गुरुचरण विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित विशेष समारोह में राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े 35 कारसेवकों को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में भारत सेवाश्रम संघ के पूर्वोत्तर क्षेत्र के प्रमुख संगठनकर्ता साधनानंदजी महाराज विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। मुख्य वक्ता के रूप में विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री गोपालजी नागरकट्टे ने संबोधित किया। गुरुचरण विश्वविद्यालय के कुलपति निरंजन राय विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहे।

समारोह में विश्व हिंदू परिषद के दक्षिण-पूर्व प्रांत के अध्यक्ष शांतनु नायक, गुवाहाटी क्षेत्र के संगठन मंत्री डॉ. दिनेश तिवारी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक शशिकांत चौथावाले, धर्म प्रसार प्रमुख पूर्णचंद्र मंडल, प्रांत कार्यालय निर्माण समिति के अध्यक्ष एवं समाजसेवी उदय शंकर गोस्वामी, जनजाति सुरक्षा मंच के लक्षीपुर जिला सलाहकार वीरेंद्र चंद्र डाओलागपु-बर्मन, राम कथा कुंज अयोध्या के मुख्य कलाकार रंजीत मंडल, वरिष्ठ संत ऋतुविजय गोस्वामी, परिषद की प्रांत उपाध्यक्ष असीमा भट्टाचार्य तथा दक्षिण असम रेंज की डीआईजी जयश्री खेरशा सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन विश्व हिंदू परिषद के प्रांत मंत्री गोपीव्रत गोस्वामी ने किया।

वक्ताओं ने अपने संबोधन में अशोक सिंघल के जीवन, संगठनात्मक क्षमता, नेतृत्व और सामाजिक योगदान को याद करते हुए कहा कि हिंदू समाज में एकता तथा सांस्कृतिक चेतना जागृत करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। विशेष रूप से राम जन्मभूमि आंदोलन में उनके योगदान और संगठन के विस्तार के लिए किए गए प्रयासों का उल्लेख किया गया। वक्ताओं ने कहा कि उनका समर्पित जीवन, कार्यनिष्ठा और नेतृत्व आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

उल्लेखनीय है कि अशोक सिंघल का जन्म 27 सितंबर 1926 को उत्तर प्रदेश के आगरा में हुआ था। छात्र जीवन से ही उनकी रुचि राष्ट्र और समाज सेवा में थी। बाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में उन्होंने अपना जीवन संगठनात्मक कार्यों के लिए समर्पित कर दिया। विश्व हिंदू परिषद के नेतृत्व में रहते हुए उन्होंने संगठन को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने में अहम भूमिका निभाई। राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख चेहरों और संगठनकर्ताओं में उनकी विशेष पहचान रही। 17 नवंबर 2015 को उनका निधन हो गया।

जन्मशताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आगामी एक वर्ष तक विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से अशोक सिंघल के जीवन, विचारों, कार्यों और संगठनात्मक योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है। समारोह में 35 कारसेवकों को सम्मानित कर राम जन्मभूमि आंदोलन में उनके योगदान के प्रति भी सम्मान व्यक्त किया गया।

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