[माकुम सह-जिला आयुक्त नीलुराम शर्मा ने स्थानीय निवासियों और कंपनी अधिकारियों के साथ की बैठक; लोगों ने प्रदूषण पर नियंत्रण और मुआवजे की उठाई मांग]
तिनसुकिया: धूल प्रदूषण और अन्य नागरिक समस्याओं को लेकर स्थानीय निवासियों के जोरदार विरोध-प्रदर्शन के बाद माकुम के सह-जिला आयुक्त नीलुराम शर्मा ने शनिवार को असम के तिनसुकिया जिले में ए.टी. रोड स्थित मेसर्स TTC Infra India के हॉट-मिक्स एवं इंफ्रास्ट्रक्चर प्लांट का निरीक्षण किया।
यह निरीक्षण स्थानीय निवासियों, विद्यालय प्रबंधन समितियों और विभिन्न सामुदायिक संगठनों द्वारा लगातार धूल प्रदूषण, अधूरे निर्माण कार्य के कारण उत्पन्न सुरक्षा संबंधी खतरों तथा आसपास की सड़कों की जर्जर स्थिति को लेकर की गई शिकायतों के मद्देनजर किया गया।
निरीक्षण के दौरान शर्मा ने स्थानीय प्रतिनिधियों, प्रभावित निवासियों और TTC Infra India के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में शिकायतों पर चर्चा करने के साथ-साथ समस्याओं के समाधान के लिए संभावित उपायों पर विचार-विमर्श किया गया। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन और कंपनी के अधिकारियों के समक्ष अपनी समस्याएं रखते हुए प्लांट की गतिविधियों से आसपास के लोगों पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव को कम करने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
यह निरीक्षण शुक्रवार देर रात हुए विरोध-प्रदर्शन के एक दिन बाद किया गया। शुक्रवार रात तिनसुकिया जिले के हुकान फुकुरी में स्थानीय निवासियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग-३७ को अवरुद्ध कर दिया था। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि कंपनी के संचालन के कारण लगातार फैल रहे धूल प्रदूषण से आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य और जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
विरोध-प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर टायर जलाए और TTC Infra India के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे बुनियादी ढांचे के विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास कार्यों के नाम पर आम लोगों के स्वास्थ्य, पर्यावरण की सुरक्षा और जीवन की गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “हम विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन प्रदूषण पर नियंत्रण जरूरी है। लोगों के स्वास्थ्य और कल्याण की कीमत पर विकास नहीं होना चाहिए।”
प्रदर्शनकारियों ने प्रदूषण के कारण आसपास के गांवों को कथित तौर पर हुए नुकसान के लिए मुआवजे की भी मांग की। उन्होंने कंपनी के संचालन से स्थानीय समुदायों पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव के लिए कंपनी को जिम्मेदार ठहराया।
राजमार्ग अवरुद्ध होने से वाहनों की आवाजाही बाधित हुई तथा यात्रियों और परिवहन संचालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। बाद में पुलिसकर्मियों ने हस्तक्षेप कर सड़क को खाली कराया और यातायात व्यवस्था सामान्य की।
प्रशासन के निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य धूल प्रदूषण से संबंधित आरोपों, निर्माण कार्यों से जुड़े सुरक्षा संबंधी मुद्दों और प्लांट की गतिविधियों से आसपास के निवासियों पर पड़ रहे समग्र प्रभाव का जायजा लेना था।
बैठक के माध्यम से प्रभावित निवासियों को प्रशासन की मौजूदगी में कंपनी प्रबंधन के समक्ष सीधे अपनी शिकायतें और चिंताएं रखने का अवसर मिला। जिला प्रशासन द्वारा शिकायतों पर आगे की कार्रवाई करने तथा समस्याओं के समाधान के लिए प्रस्तावित उपायों की समीक्षा किए जाने की संभावना है।