एक दुसरे से आगे निकलने की
भीड़ मे होड़ सी लगी है
साथ ही
शोहरत,दौलत कमाने की
बाजार हर मोड़ पर लगी है
और
अपना वर्चस्व कायम करने की
मन मे अनीति जोर लगी है
किन्तु
नीति,अनीति के हिसाब करने की
प्रभु के हाथों मे डोर लगी है
फिर भी
एक दुसरे को नीचा दिखाने की
आग हर छोर पर लगी है
अंत मे
सबकुछ छोड़ काया राख होने की
श्मशान मे ठौर लगी है
पवन कुमार शर्मा (शिक्षक)
साहित्यकार व पूर्व पत्रकार
दुमदुमा (असम)
मो.नं.९९५४३२७६७७