प्रीतम दास हाइलाकांदी, ३० अक्टूबर: किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना की २४वीं किस्त के वितरण कार्यक्रम का सीधा प्रसारण हाइलाकांदी में आयोजित किया गया। शुक्रवार को आईसीएआर नॉर्थ ईस्टर्न हिल रीजन अनुसंधान परिसर के अधीन कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) के प्रशिक्षण कक्ष में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए किसानों ने भाग लिया।गुजरात के बनासकांठा से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से देश के ९.३४ करोड़ से अधिक पात्र किसानों के बैंक खातों में पीएम किसान योजना की २४वीं किस्त की राशि हस्तांतरित की। इस चरण में किसानों को कुल १८६९० करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता प्रदान की गई।उल्लेखनीय है कि पीएम किसान योजना के तहत पात्र किसान परिवारों को प्रतिवर्ष कुल ६००० रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह राशि २००० रुपये की तीन समान किस्तों में सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा की जाती है। किसानों को कृषि कार्यों से जुड़े खर्चों में सहायता प्रदान करना तथा उनकी आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करना इस योजना के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।हाइलाकांदी के कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित सीधे प्रसारण कार्यक्रम में नुनखुली चांदपुर सरसपुर दुर्गिमारा चाइनाबस्ती कंचनपुर आर.ए., पेडलापुंजी और नागापुंजी सहित जिले के विभिन्न क्षेत्रों के किसान उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को केंद्र सरकार की विभिन्न किसान कल्याणकारी योजनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिला। साथ ही देशभर के किसानों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए किए जा रहे प्रयासों से भी वे अवगत हुए।कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों के रूप में हाइलाकांदी जिला किसान मोर्चा के अध्यक्ष विद्युत पाल, सरसपुर ग्राम पंचायत के अध्यक्ष के प्रतिनिधि राजेंद्र प्रसाद रविदास किसान मोर्चा के सचिव संजीत देवनाथ तथा संगठन के महासचिव रामदुलाल रविदास उपस्थित रहे।कार्यक्रम के संचालन एवं समन्वय की जिम्मेदारी कृषि विज्ञान केंद्र हाइलाकांदी के विषय विशेषज्ञ डॉ. सौरभ शर्मा (पादप संरक्षण) विषय विशेषज्ञ राजा राम बांकर (सब्जी विज्ञान) तथा कार्यक्रम सहायक कविता सी. शर्मा (खाद्य विज्ञान एवं गृह विज्ञान) ने निभाई।किसानों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ सरकारी कृषि योजनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी इस तरह के कार्यक्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।