आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए सामाजिक एवं व्यवहार परिवर्तन पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

जोरहाट: जोरहाट कन्वेंशन सेंटर में गुरुवार और शुक्रवार को ‘आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए सामाजिक एवं व्यवहार परिवर्तन’ (एसबीसी फॉर डीआरआर) विषय पर दो दिवसीय जिला स्तरीय आदर्श प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई।

इस कार्यशाला का संयुक्त आयोजन असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) और जोरहाट जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) द्वारा यूनिसेफ तथा एनविजन्स इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट (ईआईडी) के सहयोग से किया गया।

कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि एवं आमंत्रित विशेषज्ञों का स्वागत और सम्मान किया गया। इसके बाद जोरहाट की अतिरिक्त जिला आयुक्त एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की मुख्य कार्यकारी अधिकारी बिपांची दत्ता ने स्वागत भाषण दिया। हालिया विनाशकारी बाढ़ का उल्लेख करते हुए उन्होंने आपदा प्रबंधन में जमीनी स्तर पर आम जनता की सक्रिय भागीदारी और समुदाय आधारित प्रयासों के महत्व पर जोर दिया।

यूनिसेफ की सामाजिक एवं व्यवहार परिवर्तन विशेषज्ञ शालिनी प्रसाद ने आपदा तैयारियों के प्रति समुदायों में जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए संगठन के प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सभी सरकारी विभागों के बीच बेहतर समन्वय और सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर भी बल दिया।

एएसडीएमए के वरिष्ठ सलाहकार (एसएफडीआरआर) डॉ. सुरजीत बरुआ ने पूर्वी हिमालय के आपदा संभावित भौगोलिक क्षेत्र होने तथा भूकंप सहित विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं के प्रति इस क्षेत्र की संवेदनशीलता के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण वर्तमान समय में आपदाओं का पूर्वानुमान लगाना पहले की तुलना में अधिक कठिन हो गया है। ऐसे में आपदा पूर्व तैयारी और सामुदायिक भागीदारी का महत्व और बढ़ गया है।

उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन में स्थानीय समुदायों और आम नागरिकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए आपदा आने के बाद राहत एवं बचाव कार्यों के साथ-साथ आपदा की रोकथाम और पूर्व तैयारी पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जोरहाट के जिला आयुक्त जय शिवानी ने कहा कि वर्तमान समय में आपदाओं की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में जिला प्रशासन का मुख्य उद्देश्य आपदाओं का प्रभावी प्रबंधन करना और उनसे होने वाले नुकसान को कम करना है। उन्होंने आपदा से होने वाले नुकसान को कम करने में प्रभावी संचार व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर देते हुए सभी प्रतिभागियों से प्रशिक्षण कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लेने का आह्वान किया।

उद्घाटन सत्र के बाद आमंत्रित विशेषज्ञों ने कार्यशाला के तकनीकी प्रशिक्षण सत्रों की शुरुआत की।

कार्यक्रम का संचालन कनिष्ठ जिला प्रशासनिक सहायक प्रांजल सैकिया ने किया। इस अवसर पर नागरिक सुरक्षा विभाग के उप नियंत्रक सिमांता शर्मा, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिकारी, सहायक आयुक्त प्रणामिका कोंवर तथा डीडीएमए के परियोजना अधिकारी रोनी राजकुमार सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

दो दिवसीय कार्यशाला में जिला प्रशासन और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ लगभग ४० प्रशिक्षु भाग ले रहे हैं।

अर्नब शर्मा
डिब्रूगढ़

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