मुख्यमंत्री के नाम सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठनों का खुला पत्र, निर्दोष लोगों को प्रताड़ित करने का आरोप; रिहाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी
सुजय श्याम श्रीभूमि, 29 अक्टूबर: रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा दिए गए ‘श्रीभूमि’ नाम की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को किसी भी परिस्थिति में नष्ट नहीं होने दिया जाएगा। विभिन्न भाषाओं, धर्मों और संस्कृतियों के संगम से बनी बराक घाटी की एकता, भाईचारे और सद्भाव को हिंसा तथा उकसावे की राजनीति से कमजोर नहीं किया जा सकता। यह संदेश गुरुवार को बराक घाटी के विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री के नाम खुले पत्र के माध्यम से दिया।
श्रीभूमि शहर में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान हुई घटना को लेकर प्रतिनिधिमंडल ने श्रीभूमि सदर थाने की पुलिस पर एक पक्ष के निर्दोष युवकों को हिरासत में लेने और प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। प्रतिनिधियों ने हिरासत में लिए गए युवकों की तत्काल और बिना शर्त रिहाई की मांग करते हुए जिला आयुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। उन्होंने चेतावनी दी कि मांग पूरी नहीं होने पर बराक घाटी में व्यापक जन आंदोलन शुरू किया जाएगा।
पत्र में कहा गया कि दुर्गा पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समन्वय का महापर्व है। श्रीभूमि में बंगाली संस्कृति के साथ बिहू सहित विभिन्न समुदायों के गीत-संगीत और नृत्य उत्सवों की शोभा बढ़ाते हैं। दुर्गा पूजा के दौरान आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम विभिन्न भाषाओं, परंपराओं और कलात्मक अभिव्यक्तियों को एक मंच पर लाते हैं। असम और पूर्वोत्तर में इस साझा सांस्कृतिक परंपरा की जड़ें काफी गहरी हैं।
प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि शुक्रवार को शहर के बागारगुल इलाके में दुर्गा पूजा कार्यक्रम के लिए आमंत्रित बिहू कलाकारों के साथ कुछ उपद्रवियों ने दुर्व्यवहार किया। इसे केवल कलाकारों का अपमान नहीं, बल्कि बराक घाटी की बहुसांस्कृतिक पहचान और सामाजिक सद्भाव पर आघात बताया गया। घटना की विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठनों ने निंदा की।
प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, अगले दिन शोभायात्रा के दौरान बिहू दल के प्रतिनिधियों ने धमाइल गीत बंद कर बिहू नृत्य की धुन बजाई। इसके बाद लगभग दो किलोमीटर तक राष्ट्रीय राजमार्ग पर असमिया और बंगाली समुदाय के लोगों ने साथ मिलकर बिहू नृत्य किया। इस दौरान किसी विरोध या विवाद की स्थिति नहीं बनी। हालांकि, प्रतिमा विसर्जन के बाद कथित तौर पर नशे में धुत दो गुटों के बीच विवाद हुआ। प्रतिनिधियों का आरोप है कि पुलिस ने केवल एक पक्ष के लोगों को हिरासत में लिया, जबकि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में कुछ संगठनों और व्यक्तियों द्वारा बराक घाटी के लोगों को ‘बांग्लादेशी’ कहकर कथित रूप से भड़काने वाली टिप्पणियों पर भी आपत्ति जताई गई। प्रतिनिधियों ने ऐसी गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि किसी भी समुदाय की अस्मिता, सांस्कृतिक चेतना और आपसी विश्वास को ठेस पहुंचाने वाले बयानों को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि वे घटना की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के पक्षधर हैं, लेकिन निर्दोष लोगों को हिरासत में रखकर प्रताड़ित करना उचित नहीं है। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्षता बरतने, सभी पक्षों की भूमिका की जांच करने और हिरासत में लिए गए युवकों को तत्काल रिहा करने की मांग की।
इस अवसर पर शंकर बनिक, वर्णिता सेन, विश्वजीत घोष, विष्णु पद नाग, पृथिजीत देब, अपु बनिक, कुमारजीत दत्त, शुभजीत चक्रवर्ती, पूजा पोद्दार तथा शिलचर से दुलु दास, ननी गोपाल देब, अलोका देब और अरुंधती गुप्ता सहित बराक घाटी के विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।