चाय बागानों की अनुपयोगी भूमि पर ऑयल पाम की खेती का कृषि मंत्री पीयूष हजारिका ने किया आह्वान, उर्वरक आपूर्तिकर्ता कंपनियों को भी दी कड़ी चेतावनी

गुवाहाटी, 26 अक्टूबर: खाद्य तेल के उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने और किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष जोर देते हुए असम के कृषि, सिंचाई एवं संसदीय कार्य मंत्री पीयूष हजारिका ने आज गुवाहाटी में कृषि विभाग द्वारा आयोजित ‘राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन–ऑयल पाम’ (NMEO-OP) के तहत चाय बागानों में ऑयल पाम की खेती पर एक विशेष हितधारक सम्मेलन में भाग लिया।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए मंत्री हजारिका ने कहा कि ऑयल पाम की खेती को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि धान की खेती में जितने पानी की आवश्यकता होती है, ऑयल पाम की खेती में भी लगभग उतने ही पानी की जरूरत होती है। इसलिए इसे लेकर अनावश्यक भयभीत होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि विदेशों से खाद्य तेल आयात करने पर खर्च होने वाले हजारों करोड़ रुपये बचाकर असम के किसानों की आय बढ़ाने का यह एक सुनहरा अवसर है।

राज्य मंत्रिमंडल के निर्णय के अनुसार, चाय बागानों की अनुपयोगी भूमि के पांच प्रतिशत हिस्से में ऑयल पाम की खेती को पहले ही सरकारी मंजूरी दी जा चुकी है। असम को बागवानी के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के उद्देश्य से सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।

मंत्री ने बताया कि ऑयल पाम की खेती के माध्यम से प्रति बीघा भूमि से 50,000 रुपये तक की सुनिश्चित आय का अवसर उपलब्ध कराने की योजना है। इसके अतिरिक्त, राज्य में 15,000 हेक्टेयर कृषि भूमि पर ऑयल पाम की खेती करने और अगले पांच वर्षों में 30,000 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई के दायरे में लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

चाय बागानों की शेष पांच प्रतिशत भूमि पर बहुफसली खेती और ऑयल पाम की खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा। इस योजना में बराक घाटी को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। चाय बागानों को लीची, ड्रैगन फ्रूट और सुपारी सहित विभिन्न बागवानी फसलों के पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही, अगले वर्ष से राज्य के किसानों को प्रतिवर्ष पांच करोड़ बागवानी पौधे वितरित करने की योजना है।

मंत्री ने यह भी घोषणा की कि चाय बागानों के मालिकों को ऑयल पाम की खेती के व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने के लिए आंध्र प्रदेश और अरुणाचल प्रदेश के अध्ययन दौरे पर भेजने की व्यवस्था की जाएगी।

### उर्वरक कंपनियों को अनियमितताओं के खिलाफ कड़ी चेतावनी

इसके बाद मंत्री पीयूष हजारिका ने उर्वरक आपूर्तिकर्ता कंपनियों के साथ एक अन्य महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में किसानों को समय पर और सरकार द्वारा निर्धारित कीमतों पर उर्वरक उपलब्ध कराने की व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की गई। इस दौरान उन्होंने अनियमितताओं और किसानों के शोषण के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी।

मंत्री ने स्पष्ट कहा कि सब्सिडी वाले उर्वरक खरीदने के दौरान किसानों को किसी अन्य अनावश्यक वस्तु की खरीद के लिए बाध्य करना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि परिवहन अथवा रेलवे रैक प्वाइंट की दूरी के कारण होने वाले अतिरिक्त खर्च का बोझ किसानों या स्थानीय खुदरा विक्रेताओं पर डालना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रत्येक किसान को सरकार द्वारा निर्धारित सब्सिडी वाली कीमत पर ही उर्वरक उपलब्ध कराना सुनिश्चित करना होगा।

मंत्री ने खुदरा विक्रेताओं के शोषण और बाजार में उर्वरकों की कृत्रिम कमी पैदा करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की भी चेतावनी दी।

मंत्री हजारिका ने दोहराया कि असम के किसानों के हितों की रक्षा करना तथा राज्य को आत्मनिर्भर और कृषि के क्षेत्र में गतिशील बनाना सरकार का प्रमुख लक्ष्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने, उचित मूल्य सुनिश्चित करने और उनके अधिकारों की रक्षा करने के मामले में किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।

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