बिहू कलाकारों पर हमले की निंदा, सांप्रदायिक रंग नहीं देने की अपील

बराक घाटी मातृभाषा सुरक्षा समिति ने की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग

शिलचर, 26 अक्टूबर। श्रीभूमि जिले के करीमगंज शहर में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान बिहू नृत्य कलाकारों पर कथित हमले की बराक घाटी मातृभाषा सुरक्षा समिति, कछार, शिलचर ने कड़ी निंदा की है। संगठन ने घटना को सांप्रदायिक रंग देकर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के प्रयासों से बचने की अपील की है।

समाचार माध्यमों में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, हाल ही में मध्यरात्रि में विसर्जन स्थल पर एक स्थानीय क्लब के कुछ सदस्यों पर बिहू कलाकारों के साथ मारपीट करने का आरोप लगा है। घटना के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों की ओर से कथित तौर पर सांप्रदायिक बयानबाजी किए जाने पर समिति ने चिंता जताई है।

रविवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में समिति के अध्यक्ष सुनील राय ने कहा कि बिहू अब किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं, बल्कि असम की साझा सांस्कृतिक पहचान और गौरव का प्रतीक है। पश्चिम बंगाल सहित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिहू को सम्मान और लोकप्रियता मिली है। उन्होंने कहा कि बराक घाटी के बहुसांस्कृतिक आयोजनों और दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के अवसरों पर भी असमिया, हिंदी तथा विष्णुप्रिया मणिपुरी संगीत और नृत्य सहज रूप से देखने को मिलते हैं।

राय ने कहा कि बराक घाटी के लोगों के लिए डॉ. भूपेन हजारिका और जुबीन गर्ग उतने ही आत्मीय हैं, जितने देश के अन्य लोकप्रिय कलाकार। इसलिए श्रीभूमि की इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना को सांप्रदायिक नजरिये से देखने के बजाय तथ्यों के आधार पर समझना चाहिए और इसे व्यापक सामाजिक वैमनस्य का कारण नहीं बनने देना चाहिए।

समिति ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही जिम्मेदार नागरिकों, बुद्धिजीवियों और समाचार माध्यमों से सामाजिक सद्भाव बनाए रखने तथा शांति और आपसी विश्वास को मजबूत करने में सकारात्मक भूमिका निभाने की अपील की है।

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