झुकी हुई पलकें !

 टेढ़ी कमर, झुकी हुई पलकें

बढ़ती डगमगाती हुई, थम- थमके  

हालातों  से   थी   दु:खी

आज सुबह से थी भूखी 

यही लड़खड़ाती शब्द थे उसके अधर पर 

वो वृद्ध भिक्षुकी नजर आई सड़क पर

कंपकंपाते  हाथ फैलाई

तन पर उम्र की झुरियां थी छाई

सामने  था सेठों का मोहल्ला 

पर कईयों ने दरवाजा तक न खोला

तब एक भक्त ने उसकी भूख मिटाई

पहले भिक्षुकी को भर पेट भोजन खिलाई

फिर भक्त चला करने देव वंदन

हाथ मे लिए पुष्प,रोली और चंदन 

कह ” पवन ” यही  कर्म  है  पूजा 

इसके  सिवा  धर्म  ना  है  दूजा 

पवन कुमार शर्मा (शिक्षक)

साहित्यकार व पूर्व पत्रकार 

दुमदुमा (असम)

मो.नं. 9954327677

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