जोरहाट में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण और मतदान केंद्रों के युक्तिकरण की समीक्षा

जोरहाट: मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर २०२६–२७) और मतदान केंद्रों के युक्तिकरण को लेकर जोरहाट जिला आयुक्त कार्यालय के सम्मेलन कक्ष में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस पुनरीक्षण के लिए १ जनवरी, २०२७ को अर्हता तिथि निर्धारित किया गया है।

बैठक की अध्यक्षता जोरहाट के जिला आयुक्त जय शिवानी ने की। बैठक में असम के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप सटीक, त्रुटिरहित और समावेशी मतदाता सूची तैयार करने के उपायों पर चर्चा की गई। इसके साथ ही मतदाताओं की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए मतदान केंद्रों के पुनर्गठन और युक्तिकरण पर भी विचार-विमर्श किया गया।

प्रस्तावित उपायों के तहत १,२०० से अधिक मतदाताओं वाले मतदान केंद्रों का युक्तिकरण किया जाएगा। इस बात पर विशेष ध्यान दिया जाएगा कि किसी भी मतदाता को मतदान केंद्र तक पहुंचने के लिए दो किलोमीटर से अधिक दूरी तय न करनी पड़े। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि अपात्र, मृत और स्थायी रूप से अन्य स्थानों पर स्थानांतरित हो चुके मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत प्रपत्र-७ (फॉर्म-७) के माध्यम से कार्रवाई शुरू की जाएगी।

बैठक में चर्चा के अनुसार, मतदान केंद्रों का युक्तिकरण २ नवंबर, २०२६ तक पूरा कर लिया जाएगा। एकीकृत प्रारूप मतदाता सूची १२ नवंबर, २०२६ को प्रकाशित की जाएगी। इस प्रारूप सूची पर दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि १२ नवंबर से ११ दिसंबर, २०२६ तक निर्धारित की गई है।

सभी दावों और आपत्तियों का निपटारा २८ दिसंबर, २०२६ तक किया जाएगा। इसके बाद अंतिम मतदाता सूची ४ जनवरी, २०२७ को प्रकाशित की जाएगी।

बैठक में सहायक जिला आयुक्त, टियोक, मरियानी और तिताबर के सह-जिला आयुक्त, जिला निर्वाचन अधिकारी, निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ), सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (एईआरओ), भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों तथा संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों ने भाग लिया।

बैठक के समापन पर जिला आयुक्त जय शिवानी ने भाग लेने वाले राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया और सभी संबंधित पक्षों से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन ईमानदारी एवं कुशलतापूर्वक करने का आग्रह किया। उन्होंने राजनीतिक दलों से यह भी अनुरोध किया कि वे २५ अक्टूबर, २०२६ तक किसी भी समस्या या आपत्ति का समाधान कर लें।

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