गुवाहाटी: असम में रविवार को पारंपरिक रीति-रिवाजों, मिट्टी के दीये जलाने और समृद्ध कृषि मौसम की कामना के साथ काति बिहू, जिसे कोंगाली बिहू के नाम से भी जाना जाता है, मनाया गया।
असम के तीन प्रमुख बिहू त्योहारों में से एक काति बिहू राज्य के कृषि समुदायों के लिए विशेष महत्व रखता है। असमिया कैलेंडर के काति महीने में मनाया जाने वाला यह त्योहार कृषि चक्र के एक महत्वपूर्ण चरण का प्रतीक है। इस समय खेतों में धान की फसल बढ़ रही होती है, जबकि अगली फसल की कटाई से पहले कई परिवारों के घरों में अनाज का भंडार कम होने लगता है।
जहां रोंगाली बिहू असमिया नववर्ष का प्रतीक है और माघ बिहू फसल कटाई के मौसम की खुशियां मनाने के लिए जाना जाता है, वहीं काति बिहू सादगी और संयम के साथ मनाया जाता है। यह इस अवधि में किसानों और उनके परिवारों के सामने आने वाली कठिनाइयों को दर्शाता है।
इस त्योहार की प्रमुख परंपराओं में घरों के आंगन में स्थित पवित्र तुलसी के पौधे के पास मिट्टी के दीये जलाना शामिल है। इन दीयों को स्थानीय भाषा में ‘साकी’ कहा जाता है। इस अवसर पर परिवार शांति, अच्छे स्वास्थ्य, समृद्धि और अपने प्रियजनों की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं।
किसान अपने धान के खेतों में भी दीये जलाते हैं। इसके अलावा, लंबे बांस के खंभों पर पारंपरिक आकाश दीप, जिन्हें ‘आकाश बंती’ कहा जाता है, लगाए जाते हैं। ये दीपक अच्छी फसल की आशा और कीटों तथा अन्य प्राकृतिक चुनौतियों से उगती हुई फसल की रक्षा के प्रतीक माने जाते हैं।
यह त्योहार असमिया संस्कृति, प्रकृति और कृषि के बीच गहरे संबंध को दर्शाता है। साथ ही, यह किसानों के धैर्य और दृढ़ संकल्प को भी उजागर करता है, जो मौसम की अनिश्चितता, फसलों में लगने वाली बीमारियों और अन्य कृषि संबंधी जोखिमों का सामना करते हुए फसल तैयार होने की प्रतीक्षा करते हैं।
काति बिहू केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह असम की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक पहचान में कृषि के महत्व की भी याद दिलाता है। अपनी पारंपरिक रीति-रिवाजों के माध्यम से यह त्योहार लोगों की आस्था को मजबूत करता है, सामुदायिक संबंधों को प्रगाढ़ बनाता है और बेहतर भविष्य की उम्मीद जगाता है।
राज्यभर में घरों और धान के खेतों में दीयों की रोशनी के बीच कोंगाली बिहू का पर्व असम की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और मिट्टी से उसके अटूट संबंध को संरक्षित रखने की परंपरा को आगे बढ़ा रहा है।