जोरहाट: इंटर एजेंसी ग्रुप (आईएजी), जोरहाट ने शुक्रवार को सामुदायिक प्रतिक्रिया तंत्र (सीएफएम) और मानवीय सहायता कार्यक्रम नियोजन पर एक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। इसका उद्देश्य आपदा प्रबंधन में सामुदायिक भागीदारी, जवाबदेही और समन्वय को मजबूत करना था।
इस कार्यक्रम को रूट्स टू ब्रांचेज फाउंडेशन और यूनिसेफ के सहयोग से तथा जोरहाट जिला प्रशासन के समन्वय में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में सामुदायिक संगठनों, नागरिक समाज समूहों, मानवीय सहायता एजेंसियों और आपदा प्रभावित समुदायों के प्रतिनिधियों सहित १५ से अधिक संगठनों ने भाग लिया। प्रशिक्षण में विशेष रूप से असम में बार-बार आने वाली बाढ़ और अन्य आपदाओं को ध्यान में रखते हुए समुदाय-केंद्रित मानवीय सहायता व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
आईएजी, जोरहाट के संयोजक तीर्थ प्रसाद सैकिया ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने स्थानीय समुदायों और विभिन्न हितधारकों की भागीदारी के साथ समन्वित, पारदर्शी और जवाबदेह मानवीय सहायता कार्यों के महत्व पर प्रकाश डाला।
प्रशिक्षण सत्रों में प्रभावी सामुदायिक प्रतिक्रिया तंत्र स्थापित करने की आवश्यकता पर चर्चा की गई, ताकि आपदा प्रभावित लोगों की चिंताओं, जरूरतों और सुझावों को मानवीय सहायता कार्यक्रमों की योजना बनाने तथा उन्हें लागू करने की प्रक्रिया में शामिल किया जा सके।
प्रतिभागियों ने सामुदायिक सहभागिता बढ़ाने, शिकायत निवारण प्रणालियों को मजबूत करने और प्रभावित लोगों को राहत, पुनर्वास तथा पुनर्प्राप्ति कार्यों से जुड़ी अपनी समस्याओं एवं सुझावों को साझा करने के लिए सुलभ माध्यम उपलब्ध कराने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम में मानवीय सहायता संगठनों, नागरिक समाज समूहों और जिला प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया गया, ताकि आपदा के दौरान दी जाने वाली सहायता अधिक समावेशी, प्रभावी और कमजोर वर्गों की जरूरतों के अनुरूप हो सके।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन मानवीय सहायता कार्यक्रमों की योजना और क्रियान्वयन में सामुदायिक प्रतिक्रियाओं को शामिल करने के महत्व पर जोर देते हुए हुआ। इसका उद्देश्य जवाबदेही बढ़ाना और यह सुनिश्चित करना है कि सहायता वास्तविक जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे।