आगामी शारदीय दुर्गोत्सव के अवसर पर भुवनेश्वरी देवी फाउंडेशन की ओर से वस्त्र वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। गत 14 अक्टूबर, बुधवार को बरखला विधानसभा क्षेत्र के चंद्रनाथपुर इलाके के कालीबाड़ी एवं नूतन लाइन तथा धोलाई विधानसभा क्षेत्र के भुवन पहाड़ स्थित रियांग पुंजी में रामकृष्ण विवेकानंद सोसाइटी द्वारा संचालित श्रीमाँ सारदा कोचिंग सेंटर के छात्र-छात्राओं के हाथों में नए वस्त्र सौंपे गए। इस दिन 150 से अधिक छात्र-छात्राओं के बीच नए वस्त्र वितरित किए गए।
बच्चों को नए वस्त्र वितरित करने से पहले भुवनेश्वरी देवी फाउंडेशन के कार्यकर्ता विश्वराज चक्रवर्ती ने अपने संबोधन में कहा कि शारदीय दुर्गोत्सव की खुशियाँ सुदूरवर्ती क्षेत्रों के छोटे-छोटे बच्चों तक पहुँचाने और उनके चेहरों पर मुस्कान लाने के उद्देश्य से फाउंडेशन की ओर से यह छोटा-सा प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि त्योहार की खुशियाँ सभी के साथ बाँटने में ही वास्तविक आनंद निहित है।
उपस्थित अभिभावकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बच्चों के भविष्य के निर्माण में अभिभावकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। इसलिए अभिभावक अपने बच्चों को नियमित रूप से इस तरह के कोचिंग सेंटरों में भेजें और उन्हें पढ़ाई के प्रति प्रोत्साहित करें। बच्चे यदि मन लगाकर पढ़ाई करेंगे, तो उनका भविष्य उज्ज्वल होगा और आगे चलकर वे देश के योग्य नागरिक बनकर राष्ट्र एवं समाज के कल्याण में अपना योगदान दे सकेंगे।
विश्वराज चक्रवर्ती ने आगे कहा कि भुवनेश्वरी देवी फाउंडेशन पूरे वर्ष सुदूरवर्ती क्षेत्रों के बच्चों और आम लोगों के साथ खड़ा रहकर विभिन्न प्रकार के सेवामूलक कार्य करता आ रहा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि आने वाले दिनों में भी समाज के वंचित वर्गों और बच्चों की सहायता के लिए इस तरह के सेवामूलक कार्यक्रम निरंतर जारी रहेंगे।
इस कार्यक्रम में रामकृष्ण विवेकानंद सोसाइटी के महासचिव सुप्रदीप दत्त राय ने भुवनेश्वरी देवी फाउंडेशन के इस प्रकार के मानवीय एवं समाजसेवी कार्यों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने सुदूरवर्ती क्षेत्रों के बच्चों के बीच त्योहार की खुशियाँ बाँटने की इस पहल के लिए फाउंडेशन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद दिया।
कार्यक्रम में अन्य लोगों के अलावा रामकृष्ण विवेकानंद सोसाइटी के सह-सचिव प्रदीप राय, अपू रंजन देव, कन्हाईलाल दास सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
नए वस्त्र पाकर बच्चों के बीच खुशी और उत्साह का माहौल देखने को मिला। त्योहार से पहले की गई इस पहल ने न केवल बच्चों के चेहरों पर मुस्कान बिखेरी, बल्कि सुदूरवर्ती क्षेत्रों के लोगों और समाजसेवी संगठनों के बीच आत्मीय संबंधों को भी और अधिक मजबूत किया।