थाईलैंड के बौद्ध मंदिर, अमेरिका के स्वामीनारायण मंदिर और गोवा के दूधसागर जलप्रपात की झलक दिखाएंगे चार प्रमुख दुर्गापूजा मंडप
प्रेरणा भारती, निहार कांति राय, उधारबंद।
उधारबंद, 15 अक्टूबर। शारदीय दुर्गोत्सव को लेकर उधारबंद में उत्साह और उल्लास का वातावरण है। देवी पक्ष के आगमन के साथ ही पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में रंग गया है। कहीं ढाक की गूंज है, तो कहीं नृत्य और संगीत की मधुर स्वर-लहरियां उत्सव की रौनक बढ़ा रही हैं। इस वर्ष उधारबंद के चार प्रमुख दुर्गापूजा मंडप अपनी अनूठी थीम, आकर्षक स्थापत्य कला, पौराणिक प्रसंगों और पर्यावरण संरक्षण के संदेश के कारण विशेष आकर्षण का केंद्र बनने जा रहे हैं।
तृतीया और चतुर्थी के अवसर पर इन चारों प्रमुख पूजा मंडपों का उद्घाटन संपन्न हो चुका है। थाईलैंड के बौद्ध मंदिर से लेकर अमेरिका के स्वामीनारायण मंदिर और गोवा के प्रसिद्ध दूधसागर जलप्रपात तक की झलक इन मंडपों में देखने को मिलेगी। धार्मिक आस्था, कलात्मक अभिव्यक्ति और आध्यात्मिक चेतना का यह संगम उधारबंद के दुर्गोत्सव को खास बना रहा है।
### अस्पताल रोड पूजा मंडप में थाईलैंड के बौद्ध मंदिर की झलक
उधारबंद अस्पताल रोड सार्वजनिक दुर्गापूजा समिति के मंडप का उद्घाटन तृतीया के दिन किया गया। इस वर्ष मंडप को थाईलैंड के बौद्ध मंदिर की स्थापत्य शैली में सजाया गया है। मंडप के भीतरी हिस्से में महाभारत काल से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं को आधार बनाकर समुद्र में विलीन श्रीकृष्ण की द्वारका नगरी का दृश्य प्रस्तुत किया गया है। इसके साथ ही हुगली सेतु की तर्ज पर तैयार संरचना भी दर्शकों के आकर्षण को बढ़ा रही है।
मंडप का उद्घाटन शिलचर रामकृष्ण मिशन के सचिव श्रीमत् स्वामी गणधीशानंदजी महाराज ने किया। इस अवसर पर उधारबंद के विधायक एवं पूजा समिति के मुख्य संरक्षक राजदीप गोवाला, सलाहकार शंकर राय और राजेश राय, अध्यक्ष दुलाल चंद्र देव, राजस्व चक्र अधिकारी प्रणबानंद दोवारा तथा उधारबंद जीपी की सभानेत्री काकली कर सहित समिति के अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।
### कालीबाड़ी रोड पर अमेरिकी स्वामीनारायण मंदिर की कलात्मक छटा
चतुर्थी के दिन उधारबंद के तीन अन्य प्रमुख पूजा मंडपों का उद्घाटन हुआ। इनमें 42वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी कालीबाड़ी रोड सार्वजनिक दुर्गापूजा समिति और 20वें वर्ष में पहुंच चुके जयराम स्कूल रोड स्थित शिवसंघ क्लब का पूजा मंडप प्रमुख हैं।
कालीबाड़ी रोड की दुर्गापूजा इस बार अपनी विशिष्ट थीम को लेकर चर्चा में है। यहां अमेरिका के प्रसिद्ध स्वामीनारायण मंदिर की स्थापत्य शैली पर आधारित मंडप तैयार किया गया है। मंडप के भीतर राजस्थान की पारंपरिक कलात्मक शैली और बारीक नक्काशी का सुंदर समन्वय देखने को मिलेगा।
मंडप के साथ-साथ प्रतिमा भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगी। पश्चिम बंगाल के कलाकारों ने बाबुई घास से सूक्ष्म कलाकारी करते हुए प्रतिमा का निर्माण किया है। आयोजकों को उम्मीद है कि अपनी अनूठी शिल्पकला के कारण यह प्रतिमा श्रद्धालुओं और कला-प्रेमियों का ध्यान आकर्षित करेगी।
इस मंडप का उद्घाटन भी शिलचर रामकृष्ण मिशन के सचिव श्रीमत् स्वामी गणधीशानंदजी महाराज ने किया। समारोह में उधारबंद के विधायक राजदीप गोवाला, बरखला के विधायक किशोर नाथ तथा शिलचर के पूर्व विधायक दीपायन चक्रवर्ती उपस्थित थे। समिति के पूर्व पदाधिकारियों शंकर राय, कल्याण भट्टाचार्य और रवींद्र चक्रवर्ती के साथ वर्तमान समिति के सचिव टिंकू नाग सहित अन्य पदाधिकारियों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।
### आशीर्वचन में स्वामी गणधीशानंदजी ने दिया आनंद और सद्भाव का संदेश
उद्घाटन समारोह ढाक की गूंज, नृत्य और संगीत की मधुर प्रस्तुतियों के बीच उत्साहपूर्वक संपन्न हुआ। अतिथियों ने पूजा मंडप की कलात्मक सजावट और शिल्पकला की सराहना करते हुए बराक घाटी के लोगों से विभिन्न पूजा मंडपों का भ्रमण करने का आह्वान किया। इस अवसर पर अतिथियों को स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम का संचालन सुजीत सी और मुक्ता राय ने किया।
समारोह का सबसे महत्वपूर्ण क्षण श्रीमत् स्वामी गणधीशानंदजी महाराज का आशीर्वचन रहा। उन्होंने लोगों से अपने मन के दुख और पीड़ा को भुलाकर आनंद एवं उत्साह के इस महापर्व में शामिल होने का आह्वान किया। उनका संदेश दुर्गोत्सव की मूल भावना को रेखांकित करता है—व्यक्तिगत दुखों से ऊपर उठकर आपसी मेल-मिलाप, सद्भाव, आनंद और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना।
### शिवसंघ क्लब के मंडप में दिखेगा दूधसागर जलप्रपात
जयराम स्कूल रोड स्थित शिवसंघ क्लब ने इस वर्ष अपने मंडप की थीम गोवा के प्रसिद्ध दूधसागर जलप्रपात पर आधारित रखी है। प्रकृति की अद्भुत सुंदरता को कलात्मक रूप में प्रस्तुत करने के साथ ही आयोजकों ने पर्यावरण-अनुकूल सामग्रियों के उपयोग पर विशेष जोर दिया है।
उत्सव के माध्यम से प्राकृतिक संपदा के संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का संदेश देने की यह पहल भी दर्शकों के लिए खास आकर्षण बन सकती है।
### आस्था, संस्कृति और सद्भाव का संदेश देगा दुर्गोत्सव
दुर्गापूजा केवल रोशनी, भव्य सजावट और आकर्षक मंडपों तक सीमित नहीं है। यह पर्व भक्ति, विश्वास, सामाजिक सद्भाव और मानवीय मूल्यों का भी प्रतीक है। मां दुर्गा की आराधना के माध्यम से बुराई पर अच्छाई की विजय तथा शुभ शक्तियों के उत्थान की कामना की जाती है। रामकृष्ण मिशन के संन्यासियों की उपस्थिति और उनके आध्यात्मिक संदेश ने इस उत्सव के धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व को और बढ़ाया है।
कुल मिलाकर, देश-विदेश की स्थापत्य कला, पौराणिक विरासत, पर्यावरण संरक्षण और आध्यात्मिक चेतना के अनूठे समन्वय के साथ उधारबंद शारदीय दुर्गोत्सव के स्वागत के लिए तैयार है। अब षष्ठी से पूजा मंडपों में श्रद्धालुओं और दर्शकों की भीड़ उमड़ने की प्रतीक्षा है।
मां दुर्गा के आगमन पर सभी के जीवन से दुख और पीड़ा दूर हो, समाज में मानवता, सद्भाव और सकारात्मक चेतना का संचार हो—इसी मंगलकामना के साथ उधारबंदवासी शारदीय उत्सव के आनंद में सहभागी बनने को उत्सुक हैं।