डिब्रूगढ़: असम में जमीनी स्तर पर खेलों को बढ़ावा देने और राज्य की अप्रत्यक्ष रूप से छिपी खेल प्रतिभाओं की पहचान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए श्री श्री अनिरुद्धदेव खेल विश्वविद्यालय और ज्योति ललिता कनूई फाउंडेशन ने राज्यव्यापी खेल प्रतिभा खोज अभियान शुरू करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों, चाय बागानों और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले प्रतिभाशाली बच्चों और युवाओं को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करना है।
इस समझौता ज्ञापन पर श्री श्री अनिरुद्धदेव खेल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर हिरेंद्र नाथ शर्मा और ज्योति ललिता कनूई फाउंडेशन के न्यासी ज्योति प्रसाद कनूई ने हस्ताक्षर किए।
प्रस्तावित अभियान के उद्देश्यों और कार्यान्वयन की रूपरेखा पर चर्चा करने के लिए बुधवार को डिब्रूगढ़ जिला पुस्तकालय के निकट डीआईसीसी भवन की दूसरी मंजिल पर स्थित फाउंडेशन के अस्थायी कार्यालय में एक बैठक आयोजित की गई।
इस पहल का उद्देश्य असम के विभिन्न हिस्सों से प्रतिभाशाली बच्चों और युवाओं की पहचान करना तथा उन्हें उचित प्रशिक्षण, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और अपनी खेल प्रतिभा विकसित करने के लिए आवश्यक अवसर उपलब्ध कराना है।
इस अवसर पर ज्योति प्रसाद कनूई ने कहा कि फाउंडेशन सामाजिक कल्याण, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में कार्य करता रहा है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों और चाय बागानों में छिपी खेल प्रतिभाओं की पहचान करने की आवश्यकता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा खेलों को बढ़ावा देने और खेल प्रतिभाओं की खोज के लिए किए गए आह्वान के बाद और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
कनूई ने कहा कि ग्रामीण इलाकों और चाय बागानों में अनेक प्रतिभाशाली बच्चे और युवा उचित प्रशिक्षण सुविधाओं, आर्थिक सहायता तथा पर्याप्त खेल बुनियादी ढांचे के अभाव में अपनी खेल संबंधी महत्वाकांक्षाओं को पूरा नहीं कर पाते हैं।
उन्होंने कहा कि खेल विश्वविद्यालय के साथ यह साझेदारी ऐसे उभरते खिलाड़ियों के लिए नए अवसर पैदा करेगी और उन्हें अपनी प्रतिभा विकसित कर राज्य तथा देश का नाम रोशन करने में मदद करेगी।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर हिरेंद्र नाथ शर्मा ने इस पहल के लिए ज्योति प्रसाद कनूई और उनकी पत्नी ललिता कनूई के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने इस समझौते को विश्वविद्यालय द्वारा अपनी तरह का पहला एमओयू बताते हुए विश्वास जताया कि यह सहयोग जमीनी स्तर पर खेलों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
उन्होंने कहा कि खेल शिक्षा, प्रतिभा मूल्यांकन और प्रशिक्षण के क्षेत्र में विश्वविद्यालय की विशेषज्ञता को फाउंडेशन की सामाजिक सेवा संबंधी पहलों के साथ जोड़कर प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान की जाएगी और उनके विकास के लिए व्यवस्थित प्रयास किए जाएंगे।
यह अभियान विशेष रूप से गांवों, चाय बागानों, स्कूलों और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों तथा युवाओं पर केंद्रित होगा। इन क्षेत्रों में संसाधनों और पेशेवर प्रशिक्षण की सीमित उपलब्धता के कारण कई प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अपनी क्षमता प्रदर्शित करने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाता है।
प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन और पदक जीतने को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ इस पहल का उद्देश्य खेलों के माध्यम से बच्चों और युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास, टीम भावना तथा नेतृत्व क्षमता का विकास करना भी है।
विश्वविद्यालय और फाउंडेशन के बीच इस साझेदारी से उभरते खिलाड़ियों के लिए नए अवसर खुलने और असम में जमीनी स्तर पर खेल व्यवस्था मजबूत होने की उम्मीद है। इस पहल के माध्यम से अब तक सामने नहीं आ सकी खेल प्रतिभाओं को प्रशिक्षण और विकास की एक व्यवस्थित प्रक्रिया से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।