[शैक्षणिक उत्कृष्टता के पचास वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में वर्षभर होंगे कार्यक्रम; उद्घाटन समारोह में सेवानिवृत्त शिक्षक, पूर्व छात्र और वर्तमान विद्यार्थियों ने लिया भाग]
डिब्रूगढ़: डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय के जीवन विज्ञान विभाग ने रंगघर सभागार में भव्य समारोह के साथ अपने स्वर्ण जयंती समारोह का शुभारंभ किया। इस अवसर पर विभाग की शैक्षणिक उत्कृष्टता की पाँच दशक लंबी यात्रा का उत्सव मनाने के लिए वर्षभर आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों की शुरुआत हुई।
वर्ष १९७७ में स्थापित इस विभाग ने क्षेत्र में शिक्षण, अनुसंधान और वैज्ञानिक प्रगति के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। समारोह का शुभारंभ डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. परमानंद सोनowाल द्वारा विश्वविद्यालय ध्वज फहराने तथा स्वर्ण जयंती आयोजन समिति की अध्यक्ष प्रो. दीपशिखा बोरा द्वारा स्वर्ण जयंती ध्वज फहराने के साथ हुआ।
उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता प्रो. बोरा ने की, जबकि विभागाध्यक्ष प्रो. पंकज चेतिया ने गणमान्य अतिथियों, सेवानिवृत्त शिक्षकों, पूर्व छात्रों, वर्तमान विद्यार्थियों और अन्य आमंत्रित अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने विभाग के समृद्ध इतिहास तथा जीवन विज्ञान की शिक्षा और अनुसंधान के उत्कृष्ट केंद्र के रूप में इसके विकास पर प्रकाश डाला।
डॉ. सोनowाल ने औपचारिक रूप से स्वर्ण जयंती समारोह का उद्घाटन किया और उच्च शिक्षा तथा क्षेत्र में वैज्ञानिक प्रगति के लिए विभाग के योगदान की सराहना की। प्रो. बोरा ने विभाग के ऐतिहासिक विकासक्रम का उल्लेख करते हुए इसकी शैक्षणिक उपलब्धियों और समाज के प्रति योगदान को रेखांकित किया।
डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय के अनुसंधान एवं विकास विभाग के अधिष्ठाता प्रो. पंकज दास ने विश्वविद्यालय की अनुसंधान संबंधी उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने में जीवन विज्ञान विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित किया। उद्घाटन कार्यक्रम का संचालन डॉ. मुनमी बोरकटकी ने किया।
इस अवसर पर सेवानिवृत्त शिक्षकों और पूर्व कर्मचारियों के साथ एक विशेष संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया, जिसमें व्यक्तिगत अनुभवों और स्मृतियों के माध्यम से विभाग की यात्रा को याद किया गया। पूर्व सदस्यों डॉ. पी. के. बरुआ, डॉ. एम. इस्लाम, डॉ. एस. पी. बिस्वास, डॉ. एल. आर. सैकिया, श्री आर. अहमद, श्री सी. तालुकदार और श्री जे. दास ने विभाग से जुड़ी अपनी यादें साझा कीं। प्रो. देविद कारडोंग के समन्वय में आयोजित इस सत्र में पूर्व छात्रों और वर्तमान विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम का समापन डॉ. रतुल नाथ के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इसके बाद संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआईएमएस), लखनऊ में तंत्रिका विज्ञान विभाग की प्रमुख डॉ. जयन्ती कलिता ने आमंत्रित व्याख्यान दिया। उन्होंने स्मृति और सीखने की प्रक्रिया के तंत्रिका संबंधी आधारों पर महत्वपूर्ण जानकारियाँ साझा कीं।
दिनभर के कार्यक्रमों का समापन एक रंगारंग स्वर्ण जयंती शोभायात्रा के साथ हुआ, जिसमें विभाग के शिक्षक, सेवानिवृत्त प्राध्यापक, पूर्व छात्र, कर्मचारी और वर्तमान विद्यार्थी शामिल हुए। शोभायात्रा के माध्यम से जीवन विज्ञान की शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में विभाग के योगदान को प्रदर्शित किया गया। इसमें इस क्षेत्र की महत्वपूर्ण खोजों और उपलब्धियों को भी रेखांकित किया गया।
उद्घाटन समारोह के साथ ही विभाग की विरासत और उपलब्धियों का उत्सव मनाने के लिए वर्षभर चलने वाले कार्यक्रमों की शुरुआत हुई। इस अवसर ने शैक्षणिक उत्कृष्टता, नवोन्मेषी अनुसंधान और सामाजिक विकास के प्रति विभाग की प्रतिबद्धता को एक बार फिर सुदृढ़ किया।