पदकों को स्वर्ण में बदलना भारत के लिए अगली चुनौती
-रत्नज्योति दत्त
नागोया/दिल्ली: एशियाई खेलों के अंतिम चरण में पहुंचने के साथ भारत की तस्वीर स्पष्ट है—पदक जीतने का दायरा बढ़ा है, लेकिन स्वर्ण पदकों की संख्या उसी अनुपात में नहीं बढ़ी। नागोया भारतीय खेलों के व्यापक होते आधार के साथ-साथ प्रदर्शन को स्वर्ण में बदलने की चुनौती भी सामने रख रहा है।
भारत ने अब तक 54 पदक जीते हैं, जिनमें सात स्वर्ण, 21 रजत और 26 कांस्य शामिल हैं। इनमें 24 पदक एथलेटिक्स से आए हैं। शूटिंग, तीरंदाजी, स्क्वैश, मुक्केबाजी, भारोत्तोलन, वुशु, रोइंग, टेबल टेनिस, बैडमिंटन, कुराश और मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स में भी भारतीय खिलाड़ियों ने पदक जीते हैं। इससे पता चलता है कि भारत की पदक क्षमता अब कुछ चुनिंदा खेलों तक सीमित नहीं है।
महिलाओं की कंपाउंड तीरंदाजी टीम का स्वर्ण इस बदलाव का ताजा उदाहरण है। हालांकि हांगझोउ से तुलना करने पर स्वर्ण पदकों का अंतर साफ दिखाई देता है। वर्ष 2023 में भारत ने 28 स्वर्ण सहित कुल 106 पदक जीतकर एशियाई खेलों में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था। नागोया में कुल पदकों की संख्या हांगझोउ के आधे से अधिक हो चुकी है, लेकिन स्वर्ण पदकों की संख्या वहां हासिल स्वर्ण का केवल एक-चौथाई है।
एथलेटिक्स में भारत की बढ़ती गहराई खास तौर पर नजर आई है। महिलाओं की 4×400 मीटर रिले में स्वर्ण के अलावा गुलवीर सिंह ने तीन पदक जीते हैं। सर्वेश कुशारे, विथ्या रामराज, एंसी सोजान, मुरली श्रीशंकर और पारुल चौधरी ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
हांगझोउ में रजत के बाद रिले में स्वर्ण जीतने वाली टीम की सदस्य प्राची सिंह ने कहा, “पिछले तीन वर्षों से स्वर्ण जीतना ही हमारा एकमात्र लक्ष्य था।”
शूटिंग में हालांकि स्वर्ण पदकों की कमी स्पष्ट है। हांगझोउ में भारत ने इस खेल में सात स्वर्ण जीते थे। नागोया में नीरू धांडा का ट्रैप शूटिंग में ऐतिहासिक स्वर्ण इसलिए महत्वपूर्ण है। वह एशियाई खेलों में व्यक्तिगत ट्रैप स्पर्धा में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनी हैं।
महिलाओं के क्रिकेट में स्वर्ण जीतने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टीम के प्रदर्शन को “आत्मविश्वास, कौशल और शानदार टीम भावना” का प्रतिबिंब बताया।
समापन से पहले स्क्वैश, हॉकी, क्रिकेट और तीरंदाजी सहित कुछ अन्य स्पर्धाओं में भारत के पास पदक जीतने के अवसर हैं।
नागोया का आकलन इसलिए केवल पदक संख्या से नहीं होगा। इन खेलों ने भारत के बढ़ते प्रतिस्पर्धी आधार की तस्वीर पेश की है। अब चुनौती इस गहराई को अधिक स्वर्ण पदकों में बदलने और एशियाई स्तर की इस निरंतरता को ओलंपिक मंच तक ले जाने की है।