शिलचर: शिलचर में आर्य परिषद की तीन दिवसीय विशेष कार्यशाला शुरू हो गई है। वर्ष 2003 में दिवंगत अमलेंदु भट्टाचार्य ने आर्य परिषद, शिलचर की स्थापना की थी। इस वर्ष संगठन अपने 24वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। अगले वर्ष आर्य परिषद अपना रजत जयंती वर्ष मनाएगा।
हर वर्ष की तरह इस बार भी पुरोहितों के प्रशिक्षण तथा विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों को विधि-विधानपूर्वक संपन्न कराने की प्रक्रिया को लेकर कार्यशाला का आयोजन किया गया है। पितृपक्ष की शुरुआत के अवसर पर इस वर्ष कार्यशाला का शुभारंभ विवेकानंद रोड स्थित प्रभात भवन में हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत आर्य परिषद का ध्वजारोहण कर की गई। इसके बाद दीप प्रज्वलित किया गया तथा मंगल कलश पर पुष्प अर्पित किए गए। संगठन के संस्थापक सचिव दिवंगत अमरेंद्र भट्टाचार्य के चित्र पर भी पुष्पांजलि अर्पित की गई। इसके बाद परिषद के सचिव अनंत विजय भट्टाचार्य ने स्वागत भाषण दिया।
वर्तमान में कार्यक्रम की अध्यक्षता आर्य परिषद के अध्यक्ष तथा प्रसिद्ध शिक्षाविद् लक्ष्मीकांत भट्टाचार्य कर रहे हैं।
तीन दिवसीय कार्यशाला के पहले दिन आगामी दुर्गापूजा की तिथियों को लेकर चर्चा की जाएगी। इस वर्ष दुर्गापूजा की तिथियों को लेकर पुरोहितों और विभिन्न पूजा समितियों के बीच मतभेद सामने आए हैं। यहां तक कि पंचांग को लेकर भी भ्रम की स्थिति बनी हुई है। इसी विषय पर आज पंडितों द्वारा विस्तार से चर्चा की जाएगी।
दूसरे दिन श्राद्ध और शांति कर्म से संबंधित विभिन्न विषयों पर चर्चा होगी। तीसरे दिन पितृपक्ष के तर्पण से संबंधित विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया जाएगा।
इसके अलावा, इन तीन दिनों के दौरान सदस्यों को पूजा-पर्व, श्राद्ध अथवा अन्य धार्मिक अनुष्ठानों से संबंधित किसी भी प्रश्न या जिज्ञासा को पंडितमंडली के समक्ष रखने का अवसर मिलेगा।