बराक घाटी में फिर पुल की सुरक्षा पर सवाल, मोकईभांगा पुल में बड़ी दरार

-गैमन, हरांग और गुमड़ा के बाद अब मोकईभांगा—आखिर बार-बार क्यों प्रभावित हो रहे हैं बराक के पुल?

श्रीभूमि, 27 सितंबर। बराक घाटी में पुलों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। बदरपुर–श्रीभूमि सड़क पर स्थित मोकईभांगा पुल में बड़ी दरारें दिखाई देने के बाद श्रीभूमि जिला प्रशासन ने एहतियात के तौर पर 24 सितंबर से पुल पर भारी वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया है।

प्रशासन के आदेश के अनुसार, ट्रक, डंपर, मल्टी-एक्सल ट्रेलर और टैंकर सहित भारी वाहनों के आवागमन पर कम से कम 60 दिनों तक या पुल की स्ट्रक्चरल फिटनेस रिपोर्ट/प्रमाणपत्र मिलने तक रोक रहेगी। हालांकि छोटे वाहन, दोपहिया वाहन तथा एंबुलेंस, दमकल और पुलिस जैसे आपातकालीन वाहनों को आवागमन की अनुमति दी गई है। भारी वाहनों के लिए प्रशासन की ओर से वैकल्पिक मार्ग भी निर्धारित किया गया है।

एक के बाद एक पुलों की स्थिति पर उठ रहे सवाल

मोकईभांगा पुल की स्थिति सामने आने के बाद बराक घाटी में एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं कि गैमन, हरांग और गुमड़ा पुलों के बाद अब मोकईभांगा पुल में समस्या क्यों सामने आई है? क्या पुलों पर निर्धारित क्षमता से अधिक भार वाले वाहनों की आवाजाही इसकी एक वजह है, या इनके निर्माण एवं रखरखाव से संबंधित अन्य तकनीकी कारण भी जिम्मेदार हैं?

स्थानीय लोगों के एक वर्ग का आरोप है कि ओवरलोड कोयला और चूना-पत्थर लदे डंपर एवं ट्रकों की लगातार आवाजाही से पुलों पर अत्यधिक दबाव पड़ रहा है। यह आरोप भी सामने आया है कि कुछ महीनों तक भारी वाहनों की आवाजाही बंद रहने के बाद कथित रूप से फिर ओवरलोड चूना-पत्थर लदे वाहनों का परिचालन शुरू हुआ है।

हालांकि इन आरोपों की पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए मोकईभांगा पुल में दरार के वास्तविक कारण का पता लगाने के लिए तकनीकी जांच और प्रशासनिक स्तर पर निष्पक्ष जांच जरूरी है। यह स्पष्ट होना चाहिए कि पुल की संरचनात्मक कमजोरी, निर्धारित सीमा से अधिक भार, रखरखाव की कमी या कोई अन्य तकनीकी कारण इस स्थिति के लिए जिम्मेदार है।

दुर्गापूजा से पहले बढ़ी चिंता

आगामी दुर्गापूजा के दौरान श्रीभूमि और बराक घाटी के विभिन्न क्षेत्रों के बीच यातायात एवं माल परिवहन का दबाव बढ़ने की संभावना है। ऐसे में यदि भारी वाहनों पर लंबे समय तक प्रतिबंध जारी रहता है, तो इसका असर व्यापार, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और परिवहन व्यवस्था पर पड़ सकता है।

फिलहाल लोगों की नजर मोकईभांगा पुल की स्ट्रक्चरल फिटनेस रिपोर्ट और ओवरलोड वाहनों की आवाजाही को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की जांच पर टिकी है।

बराक घाटी में लगातार सामने आ रही पुलों से जुड़ी समस्याओं ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या पुलों की नियमित तकनीकी जांच, भार क्षमता की सख्त निगरानी और ओवरलोड वाहनों पर प्रभावी कार्रवाई के लिए अब स्थायी व्यवस्था की जाएगी?

प्रेरणा भारती, बराक घाटी।

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