शिलचर। लगभग पांच दशक की खोज के बाद बराक घाटी में प्राकृतिक गैस के भंडार मिलने की जानकारी ओएनजीसी ने दी है। कछार जिले के चंद्रपुर स्थित अमड़ाघाट-1 कुएं में यह सफलता मिली है। प्रारंभिक परीक्षण में कुएं में उल्लेखनीय मात्रा में गैस मौजूद होने के संकेत मिले हैं। हालांकि गैस की वास्तविक मात्रा और व्यावसायिक रूप से इसके दोहन की संभावनाओं को लेकर अभी परीक्षण जारी है।
शनिवार को आयोजित एक कार्यक्रम में ओएनजीसी के निदेशक (एक्सप्लोरेशन) ओ. पी. सिन्हा ने कहा कि भारत में तेल एवं गैस की खोज के इतिहास की शुरुआत पूर्वोत्तर क्षेत्र, विशेष रूप से असम से हुई थी। ओएनजीसी पिछले करीब 50 वर्षों से इस क्षेत्र में काम कर रही है। ऐसे में अमड़ाघाट-1 कुएं की सफलता को उन्होंने महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
सिन्हा ने कहा, “इस कुएं से असाधारण परिणाम मिले हैं। यह बराक घाटी में एक नए अध्याय की शुरुआत कर सकता है। यहां अच्छी मात्रा में गैस मिली है, हालांकि अभी परीक्षण जारी है।”
ओएनजीसी के अधिकारियों के अनुसार, भू-वैज्ञानिकों की खोज में इस क्षेत्र में कुछ और संभावित स्थानों की पहचान हुई है। अमड़ाघाट-1 की सफलता के बाद भविष्य में इन क्षेत्रों में भी व्यापक अन्वेषण की संभावनाएं बढ़ गई हैं।
गैस उत्पादन के लिए पाइपलाइन सबसे बड़ी जरूरत
अधिकारियों ने बताया कि गैस के व्यावसायिक उत्पादन और आपूर्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता आधारभूत ढांचे, विशेषकर गैस पाइपलाइन की है। तेल को टैंकरों के माध्यम से ले जाया जा सकता है, लेकिन प्राकृतिक गैस के उत्पादन और नियमित आपूर्ति के लिए पाइपलाइन नेटवर्क आवश्यक है। इसलिए आगामी चरण में पाइपलाइन बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
ओ. पी. सिन्हा ने कहा कि प्रतिकूल मौसम और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों जैसी चुनौतियों के बावजूद ओएनजीसी के कर्मचारी लगातार काम करते रहे हैं। उनके अथक प्रयासों का परिणाम है कि बराक घाटी में ऊर्जा क्षेत्र की नई संभावनाओं के द्वार खुले हैं।
कार्यक्रम में ओएनजीसी के बेसिन मैनेजर के. कारवन्नन, शिलचर फॉरवर्ड बेस के प्रमुख ए. के. वालिया, जीएम-एलएमडीएस एस. के. स. सहित कंपनी के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
अमड़ाघाट-1 कुएं में गैस का वास्तविक भंडार कितना है, कितना उत्पादन संभव होगा और व्यावसायिक स्तर पर इसका दोहन कितना व्यवहार्य होगा, इसकी स्पष्ट तस्वीर आगामी परीक्षणों के बाद ही सामने आएगी। हालांकि प्रारंभिक सफलता ने बराक घाटी में ऊर्जा क्षेत्र के विकास और आर्थिक संभावनाओं को लेकर नई उम्मीद जगाई है।