असम में मातृ मृत्यु दर घटकर ८४ हुई; डिब्रूगढ़ में संक्रमण नियंत्रण एसओपी और पोर्टल लॉन्च

डिब्रूगढ़: असम में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। राज्य की मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) घटकर प्रति एक लाख जीवित जन्म पर ८४ हो गई है। यह जानकारी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री अशोक सिंघल ने शुक्रवार को डिब्रूगढ़ में आयोजित राज्य स्तरीय सम्मेलन में दी।

“मातृ मृत्यु, शिशु मृत्यु एवं संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण” विषय पर आयोजित यह सम्मेलन मनोहरी टी रिजॉर्ट के कॉन्फ्रेंस हॉल में हुआ। इसमें वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों, मेडिकल कॉलेजों के अधिकारियों, चिकित्सकों और जिला स्वास्थ्य अधिकारियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने तथा स्वास्थ्य संस्थानों में संक्रमण नियंत्रण की व्यवस्था को मजबूत करने पर चर्चा की गई।

सिंघल ने बताया कि वर्ष २००४–०६ के दौरान असम की मातृ मृत्यु दर ४८० थी, जो अब घटकर ८४ हो गई है। सम्मेलन में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, राज्य की शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) भी घटकर प्रति १,००० जीवित जन्म पर २९ हो गई है। कार्यक्रम में बताया गया कि ८४ की मातृ मृत्यु दर राष्ट्रीय स्तर पर उद्धृत ८७ के आंकड़े से भी कम है।

सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण संक्रमण की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और एक समर्पित संक्रमण रोकथाम एवं नियंत्रण पोर्टल का औपचारिक शुभारंभ रहा।

एसओपी का उद्देश्य असम के स्वास्थ्य संस्थानों में संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण के लिए एक समान मानक, स्पष्ट प्रक्रियाएं और व्यवस्थित कार्यप्रणाली स्थापित करना है। पोर्टल के माध्यम से स्वास्थ्यकर्मियों को संक्रमण की रोकथाम एवं नियंत्रण से संबंधित दिशा-निर्देशों, एसओपी और अन्य आवश्यक संसाधनों तक पहुंच उपलब्ध होगी।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए सिंघल ने सुरक्षित प्रसूति देखभाल, समय पर चिकित्सकीय हस्तक्षेप, जटिलताओं की शुरुआती पहचान और उचित उपचार के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन उपायों के माध्यम से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को और कम किया जा सकता है।

सम्मेलन में मेडिकल कॉलेजों के माध्यम से जिला स्वास्थ्य प्रणालियों को तकनीकी सहायता और विशेषज्ञ मार्गदर्शन उपलब्ध कराने पर भी चर्चा हुई। मेडिकल कॉलेजों के प्रतिनिधियों ने जिलेवार रणनीतियों, पहले से किए गए उपायों और स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने की योजनाओं पर विचार-विमर्श किया।

उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं और बच्चों की शुरुआती स्तर पर पहचान करने, स्वास्थ्य संस्थानों के विभिन्न स्तरों के बीच समन्वय मजबूत करने तथा आंकड़ों पर आधारित रणनीतियां अपनाने पर विशेष जोर दिया गया।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. पी. अशोक बाबू ने संक्रमण की रोकथाम एवं नियंत्रण के उपायों पर प्रस्तुति दी। चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. मनोज कुमार चौधरी, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, असम के कार्यकारी निदेशक डॉ. अभिजीत शर्मा और असम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के प्राचार्य डॉ. संजीव काकती सहित कई वरिष्ठ अधिकारी सम्मेलन में मौजूद रहे।

डिब्रूगढ़ के जिला आयुक्त विक्रम कैरी ने स्वागत भाषण दिया।

सम्मेलन के एक अलग सत्र में स्ट्रोक के विषय पर भी चर्चा हुई। इसमें स्ट्रोक की शुरुआती पहचान, समय पर उपचार, पुनर्वास तथा परिवार और स्वास्थ्य व्यवस्था की भूमिका पर विचार किया गया।

सम्मेलन के समापन पर राज्य, जिला और स्वास्थ्य संस्थान स्तर पर समन्वित कार्रवाई के माध्यम से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को और कम करने के लिए भविष्य की कार्ययोजना पर चर्चा की गई।

इस बीच, डिब्रूगढ़ जिले ने लगातार दूसरे वित्तीय वर्ष में शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव का लक्ष्य हासिल किया है। वर्ष २०२५–२६ के दौरान जिले में दर्ज २१,८९५ प्रसवों में से एक भी प्रसव घर पर नहीं हुआ।

सम्मेलन को असम की स्वास्थ्य व्यवस्था में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने तथा संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण संबंधी बेहतर कार्यप्रणाली को संस्थागत रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया।

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