गुरुचरण विश्वविद्यालय में सात दिवसीय ‘वेद ज्ञान सप्ताह’ का शुभारंभ

वैदिक साहित्य और ज्ञान पर विशेषज्ञों ने किया मार्गदर्शन

शिलचर, 25 सितंबर। गुरुचरण विश्वविद्यालय, शिलचर के संस्कृत विभाग तथा उज्जैन स्थित महर्षि सांदीपनि वेद विद्या प्रतिष्ठान के संयुक्त तत्वावधान में वैदिक उत्सव/वेद उत्सव सप्ताह के अंतर्गत सात दिवसीय ‘वेद ज्ञान सप्ताह’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों को वैदिक साहित्य एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न आयामों से परिचित कराना है।

कार्यक्रम के प्रथम चरण में वैदिक ज्ञान एवं परंपरा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से पदयात्रा निकाली गई। इसके बाद आयोजित कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. निरंजन राय, मुख्य अतिथि डॉ. शंकर भट्टाचार्य, मुख्य वक्ता प्रो. डॉ. शांति पोखरेल, अकादमिक रजिस्ट्रार डॉ. अभिजीत नाथ तथा संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. संध्या नाथ सहित शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंगलाचरण से हुआ। संस्कृत विभाग की छात्रा अनीशा दत्ता ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। विभागाध्यक्ष डॉ. संध्या नाथ ने स्वागत भाषण दिया, जबकि कार्यक्रम के संयोजक डॉ. केशव लुइटेल ने वेद अध्ययन के महत्व तथा वैदिक ज्ञान के संरक्षण और भावी पीढ़ी तक उसके प्रसार की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

मुख्य अतिथि डॉ. शंकर भट्टाचार्य ने ‘वैदिक साहित्य का परिचय : संहिता, ब्राह्मण, आरण्यक और उपनिषद’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने वैदिक साहित्य के चार प्रमुख अंगों की संरचना एवं उनके पारस्परिक संबंधों को स्पष्ट किया।

मुख्य वक्ता एवं असम विश्वविद्यालय, शिलचर के संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. शांति पोखरेल ने ‘संहिताएं : वैदिक मंत्र, सूक्त एवं उनका महत्व’ विषय पर व्याख्यान देते हुए वैदिक मंत्रों और सूक्तों के धार्मिक, सांस्कृतिक एवं बौद्धिक महत्व पर प्रकाश डाला।

दोनों विद्वानों के व्याख्यान से विद्यार्थियों और शोधार्थियों को वैदिक साहित्य की संरचना, वैदिक मंत्रों तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न पहलुओं को समझने का अवसर मिला।

अतिथि प्रोफेसर डॉ. भृगु राजखोवा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन शोधार्थी शतरूपा भट्टाचार्य एवं डॉ. केशव लुइटेल ने किया। अंत में मंगल मंत्र के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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