डॉ. तपोधीर भट्टाचार्य समेत साहित्य एवं संस्कृति जगत की कई हस्तियां रहीं उपस्थित
शिलचर, 19 सितंबर। शिलचर के मध्यशहर सांस्कृतिक समिति के सभागार में शुक्रवार शाम ‘नया दिगंत प्रकाशनी’ के तत्वावधान में तीन नई पुस्तकों के विमोचन का समारोह आयोजित किया गया। समारोह में साहित्य, संस्कृति और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
इस अवसर पर प्रकाशनी की संपादक, लेखिका एवं कवयित्री मिता दास पुरकायस्थ की पुस्तक ‘देशकाल दिगंत’, लेखक एवं वाचिक कलाकार अमित सिकिदार की ‘शिलचर : उस समय’ तथा कवि-लेखक आशुतोष दास की ‘सृष्टि बाउल की आत्मकथा’ का विमोचन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं असम विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. तपोधीर भट्टाचार्य, पूर्व प्राध्यापक डॉ. विभास देव, वाचिक कलाकार अमित सिकिदार, भाषासंग्रामी सुनील राय, पूर्व जनसंपर्क अधिकारी हरान दे, बीएसएफ के डीआईजी कमल कुमार, झुमुर पांडे और बर्णश्री बक्शी सहित अन्य विशिष्ट अतिथियों द्वारा मंगल पंचदीप प्रज्वलित कर किया गया।
इसके बाद उपस्थित कवियों, लेखकों और पत्रकारों को उत्तरीय पहनाकर तथा पुष्प और पौधे भेंट कर सम्मानित किया गया। तत्पश्चात तीनों पुस्तकों का क्रमशः औपचारिक विमोचन किया गया।
स्वागत भाषण में मिता दास पुरकायस्थ ने बताया कि ‘देशकाल दिगंत’ में ‘बराकेर नया दिगंत’ साप्ताहिक पत्रिका में प्रकाशित संपादकीय एवं तथ्यपरक लेखों को संकलित किया गया है। पुस्तक में समकालीन समाज, राजनीति, संस्कृति, शिक्षा और जनजीवन से जुड़े विभिन्न विषयों को स्थान दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक केवल लेख-संग्रह नहीं, बल्कि बराक घाटी के सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज भी है।
कवि-लेखक आशुतोष दास ने ‘नया दिगंत प्रकाशनी’ के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि अतीत कभी समाप्त नहीं होता, बल्कि समय के साथ वह नए अर्थ और नए क्षितिज तलाशता है। उन्होंने प्रकाशनी के संचालक एवं इससे जुड़े सभी लोगों को बधाई और आभार व्यक्त किया।
लेखक एवं वाचिक कलाकार अमित सिकिदार ने अपने लेखक बनने की यात्रा साझा करते हुए बताया कि मोहल्ले की दुकानों के साइनबोर्ड लिखने से उनकी लेखन यात्रा की शुरुआत हुई। हालांकि, आकाशवाणी में कार्य करने के दौरान उन्हें लेखन की दुनिया में गंभीरता से प्रवेश करने का अवसर मिला। वहां के अनुभवों ने उन्हें आम जीवन से जुड़े विषयों को सरल और सहज भाषा में अभिव्यक्त करना सिखाया।
मुख्य अतिथि डॉ. तपोधीर भट्टाचार्य ने कहा कि पुस्तक प्रकाशन की घटनाएं भले ही नियमित रूप से होती हों, लेकिन प्रत्येक पुस्तक के पीछे लेखक की लंबी यात्रा, मेहनत और आत्मीयता जुड़ी होती है। उन्होंने मिता दास पुरकायस्थ के साथ अपने लंबे परिचय का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें बचपन से जानते हैं और एक लेखिका के रूप में उनके विकास को करीब से देखा है।
समारोह के दौरान श्रावणी सरकार और श्रेया दत्ता ने संगीत प्रस्तुत किया। लेखक शिप्रांशु दास ने अपनी एक पुस्तक मिता दास पुरकायस्थ को भेंट की।
कार्यक्रम में नेताजी शोधकर्ता नीहार रंजन पाल, लेखक शतानंद भट्टाचार्य, कस्तूरी होम चौधरी, फरीदा परवीन, चंद्र कुमार गोयाला, मिनारा बेगम चौधरी, सुखेन दास, संगीता दत्ता, परिमल कर्मकार, संगीत कलाकार मंगला नाथ, पत्रकार चयन भट्टाचार्य, कवयित्री मृदुला भट्टाचार्य सहित साहित्य एवं संस्कृति जगत की अनेक हस्तियां उपस्थित थीं।