ब्रह्मपुत्र के नीचे गोहपुर-नुमालीगढ़ सुरंग के लिए बनेंगे चार कृत्रिम द्वीप

नुमालीगढ़: असम में गोहपुर और नुमालीगढ़ के बीच ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे बनने वाली महत्वाकांक्षी सड़क-सह-रेल सुरंग परियोजना में चार कृत्रिम द्वीप महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। परियोजना के तहत दो कृत्रिम द्वीप सड़क यातायात और दो रेलवे ढांचे के लिए विकसित किए जाएंगे।

गोहपुर की ओर प्रस्तावित सड़क द्वीप की लंबाई कम से कम एक दशमलव चार किलोमीटर, जबकि नुमालीगढ़ की ओर इसका विस्तार करीब एक दशमलव छह किलोमीटर होगा। दोनों की चौड़ाई लगभग तीन सौ बीस मीटर रखी जाएगी। इनमें आरसीसी बॉक्स संरचनाओं के साथ वाहनों के लिए ठहराव क्षेत्र की सुविधा भी होगी।

रेलवे के लिए प्रस्तावित दोनों कृत्रिम द्वीप करीब पचास मीटर चौड़े और लगभग दो किलोमीटर लंबे होंगे। ब्रह्मपुत्र के तेज बहाव और भीषण बाढ़ को ध्यान में रखते हुए इन कृत्रिम द्वीपों का निर्माण विशेष इंजीनियरिंग मानकों के अनुरूप किया जाएगा।

इन द्वीपों का अंतिम पुनर्भरण स्तर नदी के उच्चतम बाढ़ स्तर से कम से कम दो दशमलव पांच मीटर ऊपर रखा जाएगा। स्थल की परिस्थितियों के अनुसार अतिरिक्त सुरक्षा उपाय भी अपनाए जाएंगे।

राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड ने चार-लेन वाली जुड़वां सुरंगों के निर्माण के लिए निविदा जारी की है। पूरी परियोजना की लंबाई करीब तैंतीस दशमलव सतहत्तर किलोमीटर होगी, जिसमें ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे पंद्रह दशमलव उनासी किलोमीटर लंबी जुड़वां सुरंग शामिल होगी।

परियोजना की अनुमानित सिविल निर्माण लागत करीब ग्यारह हजार नौ सौ बयासी करोड़ छत्तीस लाख रुपये है, जबकि कुल पूंजीगत लागत करीब अठारह हजार छह सौ बासठ करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। निर्माण कार्य पूरा करने के लिए पांच वर्ष की अवधि तय की गई है।

सुरंग की प्रत्येक ट्यूब का आंतरिक व्यास ग्यारह दशमलव पांच मीटर होगा और हर पांच सौ मीटर पर क्रॉस-पैसेज बनाए जाएंगे। नदी की तलहटी के कटाव से सुरंग को सुरक्षित रखने के लिए अधिकतम कटाव स्तर पर सुरंग के ऊपर कम से कम पच्चीस मीटर मिट्टी की सुरक्षा परत रखी जाएगी।

यह महत्वाकांक्षी परियोजना गोहपुर को राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या पंद्रह और नुमालीगढ़ को राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या सात सौ पंद्रह से जोड़ेगी। इससे वर्तमान करीब दो सौ चालीस किलोमीटर की दूरी घटकर लगभग चौंतीस किलोमीटर रह जाएगी।

परियोजना के पूरा होने से असम के साथ-साथ अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड और पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों के बीच संपर्क और माल ढुलाई को गति मिलने की उम्मीद है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने फरवरी दो हजार छब्बीस में इस परियोजना को मंजूरी दी थी। पूरा होने के बाद यह भारत की पहली अंडरवॉटर सड़क-सह-रेल सुरंग और दुनिया की ऐसी दूसरी परियोजना होगी।

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