१२ वर्षीय बालक तेंदुए के हमले में गंभीर रूप से घायल

डिब्रूगढ़: डिब्रूगढ़ जिले के खोवांग क्षेत्र के नागाबाड़ी गांव में शनिवार दोपहर तेंदुए के हमले में १२ वर्षीय एक बालक गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना उस समय हुई जब बालक जंगल के समीप से स्थानीय रूप से ‘ढेकिया’ के नाम से जानी जाने वाली सब्जी के लिए उपयोगी फर्न की पत्तियां एकत्र करने गया था।

घायल बालक की पहचान पुलक गोगोई के रूप में हुई है। उसे पहले नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए डिब्रूगढ़ के असम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एएमसीएच) रेफर किया गया।

स्थानीय लोगों के अनुसार, पुलक करीब दोपहर ३ बजे एक ९ वर्षीय बालक के साथ गांव के समीप स्थित जंगल के एक हिस्से में ढेकिया एकत्र करने गया था। इसी दौरान घनी झाड़ियों से अचानक एक तेंदुआ निकला और पुलक पर हमला कर दिया। उसके चेहरे और कानों पर गंभीर चोटें आईं।

घटना के प्रत्यक्षदर्शी ९ वर्षीय बालक ने किसी तरह पास के एक पेड़ पर चढ़कर अपनी जान बचाई। तेंदुए के जंगल की ओर भाग जाने के बाद वह पेड़ से नीचे उतरा और ग्रामीणों को घटना की जानकारी दी। इसके बाद ग्रामीण मौके पर पहुंचे और घायल पुलक को वहां से निकालकर अस्पताल पहुंचाया।

घटना के बाद नागाबाड़ी और आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों को आशंका है कि तेंदुआ अब भी बस्ती के समीप घनी झाड़ियों में छिपा हो सकता है।

सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और तेंदुए को आबादी वाले क्षेत्र से दूर भगाने के लिए अभियान शुरू किया। वनकर्मियों ने तेंदुए को डराने और उसे गांव की ओर आने से रोकने के लिए हवाई फायरिंग भी की।

ग्रामीणों के अनुसार, आसपास के जंगलों में लोग अक्सर सब्जियां और अन्य वन उत्पाद एकत्र करने जाते हैं। ऐसे में जंगली जानवरों के साथ आमना-सामना होने का खतरा बना रहता है।

यह घटना ऊपरी असम में बढ़ते मानव-तेंदुआ संघर्ष की ओर एक बार फिर ध्यान आकर्षित करती है। जंगलों में घटते प्राकृतिक आवास और वन क्षेत्रों के आसपास बढ़ती मानवीय गतिविधियों के कारण तेंदुओं के गांवों एवं आबादी वाले क्षेत्रों के करीब आने की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष का खतरा बढ़ गया है।

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