1882 से नगर पालिका, 2022 में नगर निगम और अब पहला चुनाव: चार साल के इंतजार के बाद शिलचर में सजेगा चुनावी रण

नामांकन के आखिरी दिन 42 वार्डों में उम्मीदवारों ने भरा पर्चा, टिकट से वंचित कई दावेदार निर्दलीय मैदान में; सड़क, जलजमाव, नाली, पेयजल और साफ-सफाई बनेंगे प्रमुख मुद्दे

शिव कुमार शिलचर, 11 सितंबर:

शिलचर नगर निगम चुनाव को लेकर पिछले कई दिनों से चल रही नामांकन प्रक्रिया शुक्रवार को समाप्त हो गई। नामांकन के अंतिम दिन विभिन्न राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों के साथ बड़ी संख्या में निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी अपने-अपने वार्ड से नामांकन पत्र दाखिल किया। इसके साथ ही शिलचर नगर निगम के पहले चुनाव का राजनीतिक मैदान अब लगभग तैयार हो गया है। 42 वार्डों वाले शिलचर नगर निगम चुनाव को लेकर शहर में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। कहीं उम्मीदवार समर्थकों के साथ नामांकन दाखिल करने पहुंचे तो कहीं टिकट नहीं मिलने से नाराज दावेदारों ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में उतरकर अपनी चुनौती पेश की। अब सभी की नजर नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया पर टिकी है। इसके बाद प्रत्येक वार्ड में वास्तविक मुकाबले की तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी।

हालांकि यह चुनाव शिलचर के लिए पहला नगर निगम चुनाव है, लेकिन शिलचर में स्थानीय निकाय की व्यवस्था नई नहीं है। नगर पालिका से नगर निगम तक पहुंचने के पीछे शहर के शहरी विकास और बदलती जरूरतों की लंबी कहानी है।

शिलचर के स्थानीय प्रशासन का इतिहास काफी पुराना है। उपलब्ध ऐतिहासिक जानकारी के अनुसार वर्ष 1882 में शिलचर में स्टेशन कमेटी के रूप में शहरी प्रशासन की शुरुआत हुई थी। बाद में इसकी व्यवस्था विकसित होती गई और शिलचर को नगरपालिका का स्वरूप मिला।

वर्ष 1900 में शिलचर में पहला नगरपालिका चुनाव हुआ था। यानी सिलचर के लोगों के लिए स्थानीय निकाय के चुनाव कोई नई बात नहीं है। कई दशकों तक शहर का प्रशासन नगर पालिका बोर्ड के माध्यम से चलता रहा।

समय के साथ शहर का विस्तार हुआ, आबादी बढ़ी और शहरी क्षेत्र की जरूरतें भी बदलती गईं। पुराने नगरपालिका ढांचे की तुलना में शहर को बड़े प्रशासनिक ढांचे की आवश्यकता महसूस होने लगी। इसी पृष्ठभूमि में शिलचर को नगर निगम में बदलने की प्रक्रिया आगे बढ़ी।

असम सरकार ने वर्ष 2022 में शिलचर नगर पालिका बोर्ड को अपग्रेड कर शिलचर नगर निगम का गठन किया। नगर निगम के नए स्वरूप में वार्डों की संख्या बढ़ाकर 42 कर दी गई।

यहीं से शिलचर के शहरी प्रशासन ने एक नए चरण में प्रवेश किया। लेकिन नगर निगम का गठन होने के बावजूद शहर को निर्वाचित नगर निगम परिषद के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा।

यानी नगर निगम का गठन और नगर निगम का चुनाव, दोनों एक ही प्रक्रिया नहीं हैं। निगम बनने के बाद चुनाव कराने के लिए वार्ड परिसीमन, चुनावी क्षेत्र निर्धारित करने, मतदाता सूची तैयार करने, दावे-आपत्तियों का निपटारा, मतदान केंद्रों की तैयारी और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पूरा करना जरूरी था।यही इस चुनाव की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है।

नगर निगम का गठन होने के बाद तत्काल चुनाव नहीं कराया जा सका। चुनाव से पहले वार्डों की सीमाओं और नई प्रशासनिक व्यवस्था से संबंधित तैयारियां करनी थीं। इसके अलावा मतदाता सूची तैयार करने और उसे अंतिम रूप देने की प्रक्रिया भी पूरी करनी थी।

2025 में राज्य निर्वाचन आयोग और जिला प्रशासन की ओर से चुनाव की तैयारियां शुरू की गई थीं। मतदाता सूची तैयार करने और मतदान केंद्रों को लेकर प्रशासनिक गतिविधियां भी आगे बढ़ी थीं। उस समय चुनाव जल्द होने की उम्मीद जताई गई थी, लेकिन निर्धारित समय में चुनाव नहीं हो सका।

इसके बाद भी चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ने में समय लगा। राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर अलग-अलग कारणों से चुनाव टलता रहा। यही वजह रही कि नगर निगम बनने के बाद भी शिलचर को निर्वाचित पार्षदों वाली नगर निगम परिषद नहीं मिल सकी। इस लंबे इंतजार के कारण शिलचर नगर निगम का प्रशासन निर्वाचित परिषद के बजाय प्रशासनिक व्यवस्था के माध्यम से चलता रहा। 2026 में चुनाव की प्रक्रिया ने आखिरकार रफ्तार पकड़ी। 42 वार्डों के लिए मतदाता सूची तैयार करने और उसमें संशोधन की प्रक्रिया शुरू की गई। लोगों से दावे और आपत्तियां मांगी गईं और उसके बाद अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की गई।

अंतिम मतदाता सूची के अनुसार शिलचर नगर निगम क्षेत्र में 2,70,774 मतदाता हैं। इनमें 1,29,878 पुरुष, 1,40,885 महिलाएं और 11 तीसरे लिंग के मतदाता शामिल हैं।

मतदाता सूची तैयार होने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव कार्यक्रम जारी किया और सितंबर में नामांकन प्रक्रिया शुरू हुई। शुक्रवार को नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख के साथ इस चरण का भी समापन हो गया।

शुक्रवार को नामांकन के अंतिम दिन शिलचर में चुनावी माहौल और ज्यादा गर्म दिखाई दिया। विभिन्न वार्डों से उम्मीदवार अपने समर्थकों के साथ नामांकन केंद्र पहुंचे।

कई प्रत्याशियों ने शक्ति प्रदर्शन करते हुए समर्थकों के साथ नामांकन दाखिल किया। वहीं कुछ उम्मीदवारों ने बिना बड़े जुलूस के सादगी से पर्चा दाखिल किया।

इस बार कई वार्डों में राजनीतिक दलों के अधिकृत उम्मीदवारों के साथ निर्दलीय प्रत्याशियों की मौजूदगी ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। खासकर उन नेताओं और कार्यकर्ताओं पर निगाहें हैं, जिन्हें पार्टी से टिकट नहीं मिला और जिन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है।ऐसे में कुछ वार्डों में मुकाबला सीधा न होकर बहुकोणीय होने की संभावना है।नामांकन प्रक्रिया समाप्त होने के बाद अब चुनावी प्रक्रिया का अगला महत्वपूर्ण चरण शुरू होगा। 14 सितंबर को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। इसके बाद उम्मीदवारों को नाम वापस लेने का अवसर मिलेगा और 17 सितंबर नाम वापसी की अंतिम तारीख है।

नाम वापसी के बाद प्रत्येक वार्ड में मैदान में रहने वाले उम्मीदवारों की अंतिम सूची सामने आएगी। इसके बाद राजनीतिक दल और प्रत्याशी अपने चुनाव प्रचार को पूरी ताकत के साथ आगे बढ़ाएंगे।

चुनाव में राजनीतिक समीकरण अपनी जगह हैं, लेकिन मतदाताओं के लिए स्थानीय समस्याएं सबसे बड़ा मुद्दा बनती दिखाई दे रही हैं। शिलचर शहर के कई इलाकों में सड़क, जलजमाव, नाली व्यवस्था, पेयजल, साफ-सफाई, कचरा प्रबंधन, स्ट्रीट लाइट और यातायात जैसी समस्याएं लंबे समय से चर्चा में रही हैं।बरसात के मौसम में जलजमाव और खराब नालियों की समस्या कई इलाकों में लोगों की परेशानी बढ़ाती है। वहीं कई जगहों पर सड़क और साफ-सफाई की स्थिति भी चुनावी चर्चा का हिस्सा बनी हुई है।

अब मतदाता यह जानना चाहेंगे कि चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार सिर्फ वादे करते हैं या चुनाव जीतने के बाद इन समस्याओं को नगर निगम के स्तर पर प्रभावी तरीके से उठाने में सक्षम भी होंगे।

शिलचर नगर निगम का यह चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नगर निगम बनने के बाद पहली बार शहर के लोग अपने निर्वाचित पार्षद चुनेंगे।

यह चुनाव केवल 42 पार्षदों को चुनने तक सीमित नहीं है। चुने गए पार्षद मिलकर शिलचर नगर निगम की पहली निर्वाचित परिषद का हिस्सा बनेंगे। आगे नगर निगम के महापौर और अन्य पदों से संबंधित प्रक्रिया भी इसी निर्वाचित परिषद के माध्यम से आगे बढ़ेगी।इस लिहाज से यह चुनाव शिलचर की पुरानी नगरपालिका व्यवस्था से नए नगर निगम प्रशासन की ओर एक महत्वपूर्ण राजनीतिक बदलाव का प्रतीक माना जा रहा है। राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार 3 अक्टूबर को शिलचर नगर निगम के 42 वार्डों में मतदान होगा। इसके बाद 6 अक्टूबर को मतगणना होगी।

अब नामांकन खत्म होने के बाद राजनीतिक दलों के सामने अपने उम्मीदवारों को जिताने की चुनौती होगी। वहीं निर्दलीय उम्मीदवारों के लिए भी यह चुनाव अपने राजनीतिक प्रभाव को साबित करने का बड़ा मौका होगा।

शिलचर के मतदाताओं के सामने भी अब फैसला करने का समय आ गया है। उन्हें अपने वार्ड के उम्मीदवारों के साथ-साथ नगर निगम की आगामी कार्यशैली को भी ध्यान में रखना होगा।

1882 में स्टेशन कमेटी से शुरू हुआ शिलचर के शहरी निकाय का सफर, 1900 में नगरपालिका चुनाव, फिर लंबे समय तक नगर पालिका बोर्ड और 2022 में नगर निगम का गठन। अब करीब चार साल के इंतजार के बाद 2026 में पहली बार शिलचर नगर निगम की निर्वाचित परिषद के लिए मतदान होने जा रहा है।अब असली सवाल यह है कि शिलचर की जनता अपने पहले नगर निगम में किसे मौका देती है और नई निर्वाचित परिषद शहर की पुरानी समस्याओं को दूर करने में कितनी सफल होती है।

3 अक्टूबर का मतदान इस सवाल का जवाब देगा और 6 अक्टूबर को आने वाला चुनाव परिणाम शिलचर की नई राजनीतिक तस्वीर सामने रखेगा।

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