डिब्रूगढ़: असम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एएमसीएच), डिब्रूगढ़ ने विशेष स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल ने लाइसोसोमल स्टोरेज डिसऑर्डर से पीड़ित साढ़े तीन वर्षीय बच्चे को वेलेग्लुसेरेज़ अल्फा के माध्यम से सफलतापूर्वक एंजाइम रिप्लेसमेंट थेरेपी (ईआरटी) दी।
इस उपलब्धि के साथ एएमसीएच पूर्वोत्तर भारत का पहला ऐसा केंद्र बन गया है, जहां इस दुर्लभ बीमारी के उपचार के लिए वेलेग्लुसेरेज़ अल्फा आधारित यह विशेष चिकित्सा उपलब्ध कराई गई है।
यह ऐतिहासिक उपचार एएमसीएच के बाल रोग विभाग द्वारा विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. अर्पिता गोगोई के नेतृत्व में किया गया। इसमें डॉ. डोरोथी गार्गो सहित बहु-विषयक चिकित्सा दल का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा।
यह उपचार एएमसीएच में दुर्लभ रोगों के लिए स्थापित उत्कृष्टता केंद्र के तहत प्रदान किया गया। इस उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने राष्ट्रीय दुर्लभ रोग नीति, २०२१ के तहत की है।
इस उपलब्धि से असम और पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में दुर्लभ आनुवंशिक एवं चयापचय संबंधी रोगों से पीड़ित मरीजों के लिए विशेष उपचार की पहुंच बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही, इससे उन्नत जांच सुविधाओं को मजबूत करने और मरीजों को समय पर तथा समान रूप से विशेष एवं जीवनरक्षक उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
एएमसीएच की इस सफलता को केवल एक चिकित्सा उपलब्धि के रूप में नहीं, बल्कि दुर्लभ रोगों से जूझ रहे मरीजों और उनके परिवारों के लिए अधिक सुलभ, संवेदनशील और समान स्वास्थ्य व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।
एएमसीएच की यह नवीनतम उपलब्धि पूर्वोत्तर के मरीजों तक उन्नत चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने और दुर्लभ रोगों से प्रभावित लोगों को समय पर विशेष उपचार उपलब्ध कराने की उसकी प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है।