जन्मशताब्दी पर डिब्रूगढ़ में ‘मंचरूपा’ ने सुधाकंठ को दी श्रद्धांजलि

डिब्रूगढ़: सांस्कृतिक संस्था ‘मंचरूपा’ ने महान गायक, संगीतकार और भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका की जन्मशताब्दी के समापन समारोह के तहत डिब्रूगढ़ के डॉ. रोहिणी कांता बरुआ विधि महाविद्यालय के सभागार में रंगारंग कार्यक्रम ‘बिंदुते सिंधु तुमि’ का आयोजन किया।

कार्यक्रम का उद्घाटन वरिष्ठ कलाकार एवं असम गौरव पुरस्कार से सम्मानित राम चसानी ने किया। दीप प्रज्वलन समारोह में मंचरूपा के मुख्य सलाहकार अमिया शर्मा, कलाकार एवं पेंशनभोगी पापोरी दास तथा वरिष्ठ वाद्य कलाकार मुक्ति सिंह लोहार और पुष्पा बकुलचरिया ने उनका साथ दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत मंचरूपा के कलाकारों की प्रतीकात्मक नृत्य प्रस्तुति से हुई, जिसके बाद संस्था के थीम गीत की प्रस्तुति दी गई। धेमाजी जिले की सांस्कृतिक विकास अधिकारी एवं मुख्य अतिथि कलाकार शताब्दी बोरा की नृत्य प्रस्तुति शाम के प्रमुख आकर्षणों में रही।

डिब्रूगढ़ के कलाकार समुदाय के प्रतिष्ठित कलाकारों के साथ-साथ ज्योति मोइना पारिजात के बच्चों ने डॉ. भूपेन हजारिका के सदाबहार गीत प्रस्तुत किए, जिससे दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।

एकल संगीत प्रस्तुतियां भुबन गोगोई, नीलिमा बरदोलोई, रूपानंद दत्ता, जिमी जिज्ञासा बरुआ, इमोन सौरव बरुआ, निकुंज चेतिया, बर्नित पाल, डॉ. श्रुतिधारा महंत और डॉ. सुरजीत बोरकोटकी ने दीं। अविका गोगोई, अनिता और बेदश्रुति भट्टाचार्य ने विभिन्न नृत्य प्रस्तुतियों में भाग लिया, जबकि रूबी गोगोई संदिकै द्वारा निर्देशित सामूहिक नृत्य को भी व्यापक सराहना मिली।

रिनी शर्मा ने हजारिका के प्रसिद्ध गीत ‘बिस्तीर्ण पारोरे’ की वायलिन पर प्रस्तुति दी।

कार्यक्रम के दौरान ज्योति मोइना पारिजात ने सांस्कृतिक गतिविधियों में योगदान के लिए मंचरूपा को सम्मानित किया। पारिजात के निदेशक उत्तम दत्ता ने मंचरूपा के अध्यक्ष चंदन पाठक, कार्यकारी अध्यक्ष बालिंद्र नाथ बरदोलोई, सचिव लकी चांगकाकोटी और सांस्कृतिक सचिव हसन इकबाल को गमछा और स्मृति-पुस्तिका भेंट की।

मंच पर डॉ. हजारिका के चित्र के बगल में एक ऐतिहासिक हारमोनियम भी प्रदर्शित किया गया। पारंपरिक गमछे में लिपटे इस वाद्य यंत्र को कई पीढ़ियों के प्रख्यात कलाकारों ने छुआ और बजाया है। इनमें ज्योतिप्रसाद अग्रवाला, विष्णु प्रसाद राभा, पार्वती प्रसाद बरुआ, पुलक बनर्जी, पंकज बरदोलोई और जुबीन गर्ग सहित कई समकालीन कलाकार शामिल हैं।

कार्यक्रम का संचालन हसन इकबाल ने किया। सांस्कृतिक विकास अधिकारी सुदर्शन बोरा सहित करीब १५० विशिष्ट अतिथियों और आम लोगों ने कार्यक्रम में भाग लिया।

डॉ. भूपेन हजारिका के आशीर्वाद और प्रेरणा से १९५७ में स्थापित मंचरूपा ने उनकी जन्मशताब्दी समारोह का समापन डिब्रूगढ़ के कलाकार समुदाय, ज्योति मोइना पारिजात, मंचरूपा के कलाकारों और दर्शकों द्वारा उनके कालजयी गीत ‘मनुहे मनुहोर बाबे’ की सामूहिक प्रस्तुति के साथ किया।

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