तिनखोंग में पिंजरे में कैद हुआ तेंदुआ

तिनखोंग: तिनखोंग के नंबर १ नाचनी जोकाई गांव में एक विशाल मादा तेंदुआ आखिरकार पिंजरे में कैद हो गया। तेंदुए के आतंक से पिछले करीब डेढ़ साल से भय के माहौल में रह रहे ग्रामीणों को इसके पकड़े जाने से फिलहाल कुछ राहत मिली है।

ग्रामीणों के अनुसार, पिछले करीब डेढ़ साल से तेंदुए गांव और आसपास के इलाकों में लगातार मवेशियों पर हमला कर उन्हें अपना शिकार बना रहे थे। तेंदुओं ने गाय और बकरियों सहित कई पशुओं को मार डाला है। ग्रामीणों ने बताया कि तेंदुओं को दिन के समय भी मवेशियों पर हमला करते देखा गया है, जिससे लोगों और उनके पशुधन की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई थी।

पशुधन को तेंदुओं के हमलों से बचाने और आगे की घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से स्थानीय युवाओं ने गांव में एक पिंजरा लगाया। पिंजरा लगाए जाने के महज ३० मिनट के भीतर ही एक बड़ी मादा तेंदुआ उसमें फंस गई।

तेंदुए के पकड़े जाने के बाद वन विभाग के कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को अपने नियंत्रण में लिया। वन विभाग ने तेंदुए को सुरक्षित तरीके से किसी उपयुक्त घने जंगल वाले क्षेत्र में छोड़ने की व्यवस्था की।

हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुए का खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। स्थानीय लोगों के अनुसार, गांव के दूसरे छोर पर अभी भी कम से कम ३ और तेंदुओं के दहाड़ने की आवाजें सुनाई दे रही हैं, जिससे ग्रामीणों में दहशत बनी हुई है।

लगातार बने खतरे को देखते हुए ग्रामीणों ने वन विभाग से गांव के बीच और अंतिम छोर पर रणनीतिक स्थानों पर ३ और पिंजरे लगाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि इससे तेंदुओं को पकड़ने में मदद मिलेगी और गांववासियों तथा उनके पशुधन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।

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