डिब्रूगढ़ में राज्यस्तरीय एचआईवी एवं एसटीआई जागरूकता अभियान का शुभारंभ

डिब्रूगढ़: असम में एचआईवी, एड्स और यौन संचारित संक्रमण (एसटीआई) के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से बुधवार को डिब्रूगढ़ जिला पुस्तकालय में ६० दिवसीय राज्यव्यापी सूचना, शिक्षा एवं संचार (आईईसी) अभियान का शुभारंभ किया गया। राज्यस्तरीय शुभारंभ कार्यक्रम का आयोजन असम राज्य एड्स नियंत्रण सोसायटी (एएसएसीएस) की ओर से किया गया। कार्यक्रम में असम के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री अशोक सिंघल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

राज्यसभा सांसद जोगेन मोहन, चाय जनजाति एवं आदिवासी कल्याण मंत्री रामेश्वर तेली तथा ख्वांग के विधायक चक्रधर गोगोई विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल हुए। डिब्रूगढ़ के उपायुक्त विक्रम कैरी, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अतिरिक्त सचिव मुनींद्र नाथंगेट, डिब्रूगढ़ नगर निगम के महापौर डॉ. सैकत पात्रा, असम भाजपा के उपाध्यक्ष अशोक भट्ट राय, डिब्रूगढ़ जिला परिषद की अध्यक्ष पुष्पांजलि सोनवाल, स्वास्थ्य सेवा निदेशक (परिवार कल्याण) डॉ. कमलजीत तालुकदार, एएसएसीएस की परियोजना निदेशक डॉ. इंद्रनुशी दास, असम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के प्राचार्य डॉ. संजीब काकती, डिब्रूगढ़ के संयुक्त स्वास्थ्य सेवा निदेशक डॉ. तृष्णा बोरा, युवा आइकन एवं राष्ट्रीय टेनिस खिलाड़ी अग्निभास्कर गोहाईं तथा सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर सौस्थव भुइयां भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री अशोक सिंघल ने कहा कि अभियान का उद्देश्य एचआईवी संक्रमण के विभिन्न माध्यमों के प्रति लोगों को जागरूक करना, एचआईवी/एड्स से प्रभावित एवं संक्रमित लोगों के प्रति भेदभाव को कम करना तथा एचआईवी एवं एड्स (रोकथाम एवं नियंत्रण) अधिनियम, २०१७ के संबंध में जागरूकता को मजबूत करना है।

अभियान के दौरान गर्भवती महिलाओं तथा प्रसवपूर्व देखभाल प्राप्त कर रही महिलाओं में एचआईवी और सिफलिस के प्रति जागरूकता बढ़ाने, एचआईवी जांच, कंडोम एवं एसटीआई संबंधी सेवाओं की मांग को प्रोत्साहित करने तथा राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम की टोल-फ्री हेल्पलाइन १०९७ के उपयोग को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा।

इस पहल के तहत राज्य, जिला, प्रखंड और ग्राम पंचायत स्तर पर विभिन्न सरकारी विभागों एवं प्रशासन के बीच समन्वय को मजबूत कर एचआईवी की रोकथाम एवं जागरूकता को बढ़ावा दिया जाएगा।

शुभारंभ कार्यक्रम के दौरान व्यापक आईईसी अभियान पर आधारित एक लघु वृत्तचित्र प्रदर्शित किया गया। इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।

६० दिवसीय अभियान के तहत असम के ३५ जिलों, ३,९०० गांवों और ५०० स्लम क्षेत्रों को कवर किया जाएगा। गांवों में स्थानीय निवासियों, गांव-बूढ़ाओं तथा पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों की भागीदारी से जागरूकता एवं संवेदीकरण बैठकें आयोजित की जाएंगी।

स्कूलों और कॉलेजों में भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। राज्यभर के कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों में संचालित रेड रिबन क्लब एचआईवी और एसटीआई पर विशेष जागरूकता सत्र आयोजित करेंगे। अभियान के तहत इंटरैक्टिव कार्यशालाएं, आईईसी सामग्री का वितरण, पोस्टर निर्माण प्रतियोगिताएं, क्विज, तात्कालिक भाषण प्रतियोगिताएं, मानव श्रृंखला तथा एचआईवी से संबंधित रील और लघु फिल्मों का निर्माण किया जाएगा।

अभियान के दौरान ५०० स्कूलों और २०० कॉलेजों को शामिल किया जाएगा। इसके अलावा सरकारी अस्पतालों में १०० विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे, जहां एचआईवी एवं एसटीआई की नि:शुल्क जांच, परामर्श और उपचार सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

अभियान के दौरान रेडियो, टेलीविजन और समाचार पत्रों के माध्यम से एचआईवी संबंधी संदेशों का व्यापक प्रचार किया जाएगा। नुक्कड़ नाटक जैसे लोक माध्यमों का भी उपयोग होगा। बाहरी प्रचार के तहत होर्डिंग, कियोस्क, बस ब्रांडिंग, मोबाइल आईईसी वाहन, सार्वजनिक घोषणाएं और रैलियां आयोजित की जाएंगी।

एएसएसीएस के अनुसार, ६० दिवसीय अभियान के दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का भी व्यापक उपयोग कर आम जनता के बीच एचआईवी एवं यौन संचारित संक्रमणों के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाएगी।

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