नुमलीगढ़ में मानव-हाथी सहअस्तित्व मजबूत करने के लिए १४ निगरानी टावर बनाएगा एनआरएल

नुमलीगढ़: असम के नुमलीगढ़-मोरांगी क्षेत्र में मानव-हाथी सहअस्तित्व को मजबूत करने के उद्देश्य से नुमलीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड (एनआरएल) ने हाथियों की निगरानी के लिए १४ टावर स्थापित करने की पहल की है। ये टावर हाथियों की आवाजाही वाले चिन्हित क्षेत्रों में स्थापित किए जाएंगे।

इस परियोजना पर करीब ६४.७५ लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसका उद्देश्य जंगली हाथियों की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए प्रभावी पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित करना है।

प्रस्तावित निगरानी टावर ढोलागांव, नंबर २ कैवर्ता, बोगोरियानी, कुरुवाबाही, धूलियागांव, नंबर ५ रोंगबोंग, नंबर ४ रोंगबोंग, बरचापोरी, मिथामचापोरी, पोंका सेंगामोराजन, हातीमोराजन, दिफालोपाथार, भुलागुड़ी और करदोईगुड़ी में स्थापित किए जाएंगे।

ये निगरानी केंद्र विशेष रूप से शाम और रात के समय उपयोगी होंगे, जब हाथियों की आवाजाही अक्सर कृषि क्षेत्रों, चाय बागानों और मानव बस्तियों की ओर होती है। हाथियों की गतिविधियों का समय रहते पता चलने से स्थानीय निवासियों और संबंधित अधिकारियों को चेतावनी जारी करने तथा आवश्यक एहतियाती कदम उठाने में मदद मिलेगी।

प्रत्येक टावर की अनुमानित लागत करीब ५ लाख रुपये होगी। इनमें पर्यावरण अनुकूल सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिनमें सौर ऊर्जा से संचालित रोशनी और पंखे तथा सौर जल-तापन प्रणाली शामिल हैं। टावरों में आसपास के खेतों में काम करने वाले किसानों के लिए विश्राम स्थल और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध कराने की योजना है।

परियोजना योजना के अनुसार, यह बुनियादी ढांचा क्षेत्र में कृषि पर्यटन और प्रकृति आधारित पर्यटन को भी बढ़ावा दे सकता है। नुमलीगढ़-मोरांगी क्षेत्र का कृषि परिदृश्य, चाय बागान और हाथियों का प्राकृतिक आवास इसे पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनाते हैं।

इस पहल से स्थानीय समुदायों, वन विभाग और अन्य संबंधित अधिकारियों के बीच समन्वय मजबूत होने की उम्मीद है। एनआरएल ने इस बात पर जोर दिया है कि मानव-हाथी संघर्ष से निपटने के लिए केवल बुनियादी ढांचा पर्याप्त नहीं है। इसके लिए स्थानीय समुदायों की भागीदारी और जन-जागरूकता भी महत्वपूर्ण होगी।

यह परियोजना नुमलीगढ़-मोरांगी क्षेत्र में मानव और हाथियों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा दीर्घकालिक सहअस्तित्व को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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