काजीरंगा: असम के गोलाघाट जिले के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के कोहोरा क्षेत्र में वन विभाग की टीम ने शुक्रवार को अवैध वन्यजीव व्यापार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एक जीवित टोकाय गेको को बरामद किया और एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया।
असम के वन एवं पर्यावरण मंत्री जयंत मल्ल बरुआ ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कार्रवाई की जानकारी साझा करते हुए बताया कि बोकाखाट रेंज की टीम ने लाटाबाड़ी इलाके में कोहोरा निवासी राहुल करमाकर को कथित तौर पर टोकाय गेको के अवैध व्यापार में संलिप्तता के आरोप में पकड़ा। उसके कब्जे से एक जीवित टोकाय गेको बरामद किया गया।
मंत्री ने बताया कि टोकाय गेको वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत संरक्षित प्रजाति है। मामले की आगे जांच की जा रही है, ताकि इस वन्यजीव की आपूर्ति के स्रोत का पता लगाने के साथ-साथ अवैध कारोबार में शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा सके।
टोकाय गेको (गेको गेको) दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में पाई जाने वाली एक विशिष्ट छिपकली प्रजाति है। कई पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों में इसका सांस्कृतिक महत्व है। कुछ स्थानों पर इसे सौभाग्य और उर्वरता का प्रतीक माना जाता है। हालांकि, पारंपरिक चिकित्सा और पालतू पशु व्यापार के लिए इसकी मांग के कारण यह अवैध वन्यजीव व्यापार के निशाने पर भी रही है।
भारत में टोकाय गेको को वर्ष २०१४ में वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत संरक्षित प्रजाति घोषित किया गया था। वर्ष २०१९ में इसे अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव एवं वनस्पति व्यापार सम्मेलन की परिशिष्ट दो सूची में भी शामिल किया गया, जिससे इसके अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर अतिरिक्त नियंत्रण लागू हुआ।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष डिब्रूगढ़ में भी ११ टोकाय गेको को बचाया गया था। डिब्रूगढ़ की विशेष कार्यबल टीम ने पुलिस उपाधीक्षक सत्येंद्र सिंह हजारी के नेतृत्व में लाहोवाल स्थित सन फीस्ट ढाबा से तीन लोगों के कब्जे से इन गेको को बरामद किया था।
वन्यजीव संरक्षण से जुड़े एक सूत्र के अनुसार, भारत से टोकाय गेको की अन्य देशों में तस्करी संगठित तरीके से किए जाने की आशंका है। सूत्र ने बताया कि इस नेटवर्क से जुड़े लोग वन क्षेत्रों से गेको पकड़ने के लिए स्थानीय लोगों का इस्तेमाल करते हैं और बाद में इन्हें विभिन्न माध्यमों से तस्करी नेटवर्क तक पहुंचाया जाता है।
काजीरंगा में हुई ताजा कार्रवाई ने एक बार फिर असम में दुर्लभ वन्यजीवों के अवैध कारोबार के बढ़ते नेटवर्क पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वन विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि बरामद टोकाय गेको को कहां से पकड़ा गया था और इसके पीछे किसी बड़े तस्करी नेटवर्क की भूमिका है या नहीं।