गुरुचरण विश्वविद्यालय में नवागत स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के लिए ‘दीक्षारंभ’ कार्यक्रम

गुरुचरण विश्वविद्यालय, शिलचर में बुधवार को शैक्षणिक सत्र 2026-27 के नवागत स्नातकोत्तर प्रथम सेमेस्टर के विद्यार्थियों के स्वागत के लिए ‘दीक्षारंभ’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में नए विद्यार्थियों का औपचारिक रूप से स्वागत किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शिलचर रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम के स्वामी वैकुंठानंदजी महाराज उपस्थित रहे। इसके अलावा गुरुचरण विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. निरंजन राय, कुलसचिव डॉ. विद्युत कांति पाल, शैक्षणिक कुलसचिव डॉ. अभिजीत नाथ, छात्र कल्याण अधिष्ठाता (DSW) डॉ. जयदीप पाल, विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. नीलेंदु धर, वाणिज्य संकाय के अधिष्ठाता प्रो. संजीव भट्टाचार्य तथा भाषा संकाय के अधिष्ठाता प्रो. पंथप्रिय धर सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, शिक्षक-शिक्षिकाएं और विद्यार्थी मौजूद रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय के प्रथम स्थापना वर्ष की उपलब्धियों पर पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा निर्मित वृत्तचित्र ‘गुरुचरण यूनिवर्सिटी—टुवर्ड्स एक्सीलेंस’ के प्रदर्शन से हुई। इसके बाद दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया गया। स्वागत भाषण डॉ. जयदीप पाल ने प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए स्वामी वैकुंठानंदजी महाराज ने उन्हें स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपने जीवन को केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों तक सीमित न रखकर उसे व्यापक मानवीय और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से देखने की क्षमता विकसित करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि जन्म से मृत्यु तक मनुष्य के जीवन की प्रत्येक अवस्था में ऐसे मूल्य और आदर्श निहित होते हैं, जो उसे सही दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। महापुरुषों का जीवन हमारे लिए मार्गदर्शक उदाहरण है। उनके जीवन के विभिन्न चरणों में ऐसे अनेक आदर्श और प्रेरणाएं मिलती हैं, जिन्हें अपनाकर युवा अपने जीवन को सही दिशा दे सकते हैं।

कार्यक्रम के माध्यम से नवागत विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय के शैक्षणिक वातावरण, मूल्यों और जिम्मेदारियों से परिचित कराने के साथ ही उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रेरित किया गया।

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