नजीरा: हाल की बाढ़ से प्रभावित बच्चों के भावनात्मक और बौद्धिक विकास को सहारा देने के उद्देश्य से सामाजिक संस्था रैनड्रॉप्स इनिशिएटिव ने ‘पाखी प्रोजेक्ट’ की शुरुआत की है। परियोजना के तहत ऊपरी असम के बाढ़ प्रभावित गांवों में खुले बाल पुस्तकालय स्थापित किए जाएंगे।
गुवाहाटी के सामाजिक कार्यकर्ता अबिद आजाद के नेतृत्व में संचालित इस स्वैच्छिक संगठन ने ऊपरी असम के कम से कम १०० बाढ़ प्रभावित गांवों में १०० खुले बाल पुस्तकालय स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। इस परियोजना का नाम लोकप्रिय असमिया गीत ‘पाखी’ के नाम पर रखा गया है, जिसे दिवंगत गायक जुबीन गर्ग ने लोकप्रिय बनाया था।
परियोजना के तहत पहला पुस्तकालय १५ अगस्त को नजीरा सह-जिले के संतक क्षेत्र के हांडीक चेतिया गांव में शुरू किया गया। इसके बाद गरगांव चारियाली, बकता नेमुगुड़ी मोलिया गांव और नजीरा शहर में भी पुस्तकालय स्थापित किए गए।
रैनड्रॉप्स इनिशिएटिव ने इससे पहले शिवसागर और चराईदेव के बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत कार्य किए थे। संस्था के स्वयंसेवकों ने प्रभावित परिवारों के बीच खाद्य सामग्री और कपड़े वितरित करने के साथ-साथ विभिन्न सामुदायिक श्रम एवं राहत गतिविधियों में भी भाग लिया था।
संस्था के अनुसार, बाढ़ के कारण कई इलाकों में बच्चों की सामान्य पढ़ाई और दिनचर्या प्रभावित हुई है। ऐसे समय में पुस्तकालय बच्चों को किताबों तक पहुंच के साथ-साथ पढ़ने, सीखने और रचनात्मक गतिविधियों के लिए एक सुरक्षित एवं सहयोगी वातावरण उपलब्ध कराने का प्रयास है।
रैनड्रॉप्स इनिशिएटिव असम में मुफ्त भोजन वितरण, पौधारोपण और सामुदायिक राहत कार्यों सहित विभिन्न सामाजिक कल्याण गतिविधियों से जुड़ा रहा है। ‘पाखी प्रोजेक्ट’ के माध्यम से संस्था अब तत्काल राहत से आगे बढ़कर बाढ़ प्रभावित बच्चों की शिक्षा, मानसिक सहारा और दीर्घकालिक कल्याण पर ध्यान केंद्रित कर रही है।