डिब्रूगढ़: डिहिंग पटकाई राष्ट्रीय उद्यान में एक नर रॉयल बंगाल टाइगर कैमरा ट्रैप में कैद हुआ है। इस तस्वीर के सामने आने के साथ ही वर्षावन क्षेत्र में इस दुर्लभ और रहस्यमयी बड़े वन्यजीव की मौजूदगी की वैज्ञानिक रूप से पुष्टि हो गई है।
यह बाघ भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (जेडएसआई) द्वारा डिगबोई वन प्रभाग के अंतर्गत मरघेरिटा पश्चिम वन परिक्षेत्र के सहयोग से चलाए जा रहे कैमरा ट्रैप निगरानी अभियान के दौरान रिकॉर्ड किया गया।
असम के पर्यावरण एवं वन मंत्री जयंत मल्ल बरुआ ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के माध्यम से जानकारी साझा करते हुए कहा कि कैमरा ट्रैप से प्राप्त तस्वीर ने राष्ट्रीय उद्यान में बाघ की मौजूदगी को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित कर दिया है। इससे पहले वन विभाग के अधिकारियों को क्षेत्र में बाघ के पदचिह्न मिले थे, जिससे यहां बाघ की संभावित मौजूदगी के संकेत मिले थे।
मंत्री ने इस उपलब्धि को असम के वर्षावन परिदृश्य के लिए “दुर्लभ और उल्लेखनीय क्षण” बताया। उन्होंने बाघ की मौजूदगी की पुष्टि में वन विभाग के अधिकारियों और अग्रिम पंक्ति के वनकर्मियों की निरंतर गश्त, निगरानी और सतर्कता की सराहना की।
कैमरा ट्रैप में रॉयल बंगाल टाइगर की तस्वीर सामने आने से राज्य के वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरणविदों में खुशी की लहर है। वन्यजीव कार्यकर्ता देवोजित मोरान ने इस घटनाक्रम का स्वागत करते हुए कहा कि डिहिंग पटकाई में पहले भी रॉयल बंगाल टाइगर की मौजूदगी की खबरें सामने आती रही थीं, लेकिन अब तक इसे प्रमाणित करने के लिए कोई फोटोग्राफिक साक्ष्य उपलब्ध नहीं था।
मोरान ने कहा कि डिहिंग पटकाई राष्ट्रीय उद्यान में रॉयल बंगाल टाइगर की मौजूदगी अच्छी खबर है। पहले इसके बारे में केवल खबरें और आशंकाएं सामने आती थीं, लेकिन अब कैमरा ट्रैप के माध्यम से इसकी वैज्ञानिक पुष्टि हो गई है।
उन्होंने कहा कि डिहिंग पटकाई एक विशिष्ट वर्षावन पारिस्थितिकी तंत्र है, जहां कई दुर्लभ और संकटग्रस्त वन्यजीव प्रजातियां पाई जाती हैं।
डिहिंग पटकाई राष्ट्रीय उद्यान डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया जिलों में फैला हुआ है और इसका क्षेत्रफल २३१.६५ वर्ग किलोमीटर है। वहीं, डिहिंग पटकाई का विस्तृत वर्षावन परिदृश्य ५७५ वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में फैला है, जो डिब्रूगढ़, तिनसुकिया और चराइदेव जिलों से होते हुए अरुणाचल प्रदेश के तिरप और चांगलांग जिलों तक विस्तारित है।
डिहिंग पटकाई में रॉयल बंगाल टाइगर की ताजा मौजूदगी को क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता और पारिस्थितिक महत्व का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। साथ ही, यह घटना वर्षावन के प्राकृतिक आवास की सुरक्षा और वन्यजीवों की वैज्ञानिक निगरानी को लगातार मजबूत करने की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है।