सफलता ही सफलता मिली,

हांलांकि, लीक से हटकर कुछ कार्य किये गुरु माधव देव जी ने……मुरारी केडिया 

खटरा सत्र/मूर्ति स्थापना…..असम के दरंग जिले के शिपाझार /मंगलदै शहर से पथारु घाट पार कर कुछ ही दूरी पर स्थित है ‘खटरा सत्र’ .माधव देव जी के शिष्य लेचाकोनिया गोविंद आता ने बड़ी ही स्थानीय बिषम परिस्थितियों में इस सत्र की स्थापना की,आये दिन वहां लूट खसोट, मारपीट एवं आतंकी घटनाओं के चलते, निराकार अर्थात् मूर्तिविहीन सत्र लोगों को आकर्षित नहीं कर पा रहा था, परिस्थिति भी विषम थी. ऐसे में गोविंद आता जी इस समस्या का समाधान ढूंढने गुरु माधव देव जी के पास जाते हैं.

गुरु जना ने राम, लक्ष्मण, सीता और हनुमान की मूर्ति माधव देव को दी.यह मूर्ति भाउना नृत्य के दौरान प्रयोग में लाई जाती थी. निर्देशानुसार मूर्ति स्थापित की गई. धीरे धीरे मूर्ति पूजकों का आना शुरू हो गया.मन्दिर में अर्थात् सत्र में दोनों तरह के भक्तों का सामंजस्य शुरु हो गया. नाम धर्म के प्रचार ने भी इस प्रकार धीरे धीरे गति पकड़ी.

वर्तमान में यहां दोनों ही पंथ के भक्त आते हैं, दोनों ही पंथों के भक्तों को अपनी ओर आकर्षित कर सामंजस्य की स्थिति स्थापित करता है,हमारा खटरा सत्र. यहां आने वाले सभी भक्त इस व्यवस्था का पालन करते हैं .

उपरोक्त जानकारी लेखक ने वहां जाकर स्वयं एकत्रित की है.फिर भी कोई भूल भ्रांति हो तो लेखक क्षमा चाहता ह।

तांती कूंची में नटूआ घर/रंग घर- हिंदी में कहावतहै-चमत्कारको   ….. .

बिजली की चमक अनायास ही प्रेरित करती है आसमान की ओर देखने के लिए. बिजली की चमक से ही प्रेरित होकर माधव देव जी ने तांती कूंची में हरि मन्दिर/नटुवा घर बनवाया जहां कीर्तन,झुमुरा/नटुवा नाच,नाटक जिनमें ‘राम यात्रा’ का मंचन लोगों को अधिक लुभाने वाला था. यह सब थी लुभावनी चमक। इन सबके साथ सुरीली आवाज के धनी माधव देव जी के द्वारा गायन।लोग इनके भजनों को सुनने के लिए लालायित रहते थे एवं बड़ी संख्या में लोग आने लगे।

इसी सुअवसर का लाभ मिलने लगा,माधव जी को, धार्मिक उपदेश एवं एक शरण नाम धर्म की शिक्षा और दीक्षा देने में। हालांकि उपरोक्त मनोरंजन घर लीक से हटकर था,पर था आवश्यक। ताकि अन्य धार्मिक धाराओं के लोग आकर्षित हो सके एवं एक शरण नाम धर्म से जुड़ सके।इस कार्य में भी उन्हें आशातीत सफलता भी मिली।

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