भागाबाजार में ट्रक छीनने की कोशिश और महिला से मारपीट का आरोप, आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग

शिलचर, 19 अगस्त: धोलाई थाना क्षेत्र के भागाबाजार में 17 अगस्त को ट्रक रोककर कथित रूप से जबरन कब्जे में लेने की कोशिश और एक महिला के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। घटना को लेकर पीड़ित पक्ष ने धोलाई थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की है।

शिकायत के अनुसार, फैयसल आलम लस्कर के 16-चक्का ट्रक (पंजीकरण संख्या AS-LU-E-C-3027) को भागाबाजार के दक्षिणी हिस्से की ओर ले जाया जा रहा था। इसी दौरान अमजद हुसैन लस्कर ने कथित तौर पर ट्रक को रोककर चालक को धमकाया और जबरन वाहन अपने कब्जे में लेने का प्रयास किया।

बताया गया है कि वाहन मालिक फैयसल की अनुपस्थिति में उनकी पत्नी बेबी सुल्ताना लस्कर ने मौके पर पहुंचकर इसका विरोध किया। आरोप है कि अमजद हुसैन लस्कर और उसके छोटे भाई आजमल हुसैन लस्कर ने सार्वजनिक रूप से बेबी सुल्ताना के साथ गाली-गलौज और मारपीट की। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि महिला का दुपट्टा खींचकर उसके गले और बाल पकड़कर घसीटा गया तथा उसे शारीरिक रूप से चोट पहुंचाई गई।

घटना की जानकारी मिलने पर बेबी के छोटे भाई दिलवार हुसैन ने बीच-बचाव का प्रयास किया, लेकिन आरोप है कि उनके साथ भी मारपीट की गई। इसके बाद दोनों घायलों की ओर से धोलाई थाने में शिकायत दर्ज कराई गई।

पीड़ित पक्ष का आरोप है कि शिकायत के बावजूद अमजद और आजमल की अब तक गिरफ्तारी नहीं हुई है। उनका यह भी दावा है कि आरोपी पक्ष की ओर से उन्हें कथित रूप से जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। मामले को लेकर उन्होंने शिलचर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक से भी शिकायत की है।

शिकायत के मुताबिक, बाद में उक्त ट्रक को लेकर अमजद कथित तौर पर मिजोरम जाने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान धोलाई पुलिस ने भैराटी गेट के सामने ट्रक को रोककर जब्त कर लिया और थाने ले आई। हालांकि, पीड़ित परिवार का आरोप है कि इसके बावजूद मामले में नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की गई है।

पीड़ित बेबी सुल्ताना लस्कर और दिलवार हुसैन ने असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा तथा जिला पुलिस अधीक्षक से मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कर आरोपों की सत्यता सामने लाने और दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करने की मांग की है।

नोट: मारपीट, धमकी और ट्रक छीनने के प्रयास से जुड़े आरोप शिकायतकर्ता पक्ष के हैं। मामले में पुलिस जांच और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही आरोपों की अंतिम पुष्टि हो सकेगी।

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