विशेष प्रतिनिधि शिलचर, 14 अगस्त: असम विश्वविद्यालय में छात्र दाखिला प्रक्रिया में अनियमितता के आरोपों को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन की निष्क्रियता के आरोपों को अधिकारियों ने सिरे से खारिज किया है। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, सोशल मीडिया के साथ-साथ लिखित रूप में प्राप्त शिकायतों पर करीब एक महीने पहले ही जांच समिति गठित कर दी गई थी। समिति की सिफारिश के आधार पर पुलिस में प्राथमिकी भी दर्ज कराई जा चुकी है।
सोमवार को कुछ छात्रों ने विश्वविद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार के सामने अचानक प्रदर्शन शुरू कर दिया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने तत्काल प्रदर्शनकारियों के समक्ष अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए प्रवेश मार्ग से अवरोध हटाने की अपील की। प्रदर्शनकारी अपनी मांग पर अड़े रहे, जिसके बाद कुलपति प्रो. राजीव मोहन पंत की मौजूदगी में आंदोलनरत छात्रों के साथ बैठक आयोजित की गई।
बैठक में विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. प्रदोष किरण नाथ ने बताया कि शिकायत प्राप्त होने के बाद 8 जुलाई को डीन, अकादमिक्स के नेतृत्व में जांच समिति गठित की गई थी। समिति ने संबंधित छात्रों से पूछताछ करने के साथ विभिन्न दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की। जांच समिति ने ऑडियो क्लिपिंग्स की फॉरेंसिक जांच की आवश्यकता बताते हुए पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराने की सिफारिश की।
इसके बाद जांच में सामने आए तथ्यों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर 13 जुलाई को धोआरबंद थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। ऑडियो क्लिपिंग्स सहित संबंधित दस्तावेज और जांच समिति की रिपोर्ट भी पुलिस को सौंप दी गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने निष्पक्ष जांच में पुलिस को हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन दिया है।
बैठक में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा सभी तथ्य सामने रखे जाने के बावजूद प्रदर्शनकारी छात्र अपनी मांग पर कायम रहे। उन्होंने छात्र संघ के अध्यक्ष राजकिंकर चक्रवर्ती को तत्काल निलंबित करने की मांग की। इस पर कुलपति प्रो. पंत ने स्पष्ट किया कि मामला फिलहाल पुलिस जांच के अधीन है। आरोपी के खिलाफ अभी तक कोई अंतिम प्रमाण अथवा जांच रिपोर्ट विश्वविद्यालय को प्राप्त नहीं हुई है। ऐसे में विश्वविद्यालय के नियमों का पालन किए बिना निलंबन, निष्कासन अथवा अन्य दंडात्मक कार्रवाई करना संभव नहीं है।
डीन, स्टूडेंट्स वेलफेयर प्रो. बरुणज्योति चौधरी ने बताया कि निर्वाचित छात्र संघ अध्यक्ष को पद से हटाने के लिए छात्र संघ के संविधान में निर्धारित महाभियोग (Impeachment) प्रक्रिया का प्रावधान है। कुलपति ने संबंधित नियमों का अध्ययन कर निर्वाचित प्रतिनिधि के खिलाफ संभावित कार्रवाई पर विचार करने के लिए एक समिति गठित करने का प्रस्ताव रखा। हालांकि, आंदोलनरत छात्रों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया और आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया। बाद में आंदोलन वापस लिए जाने की जानकारी मिली है।
रजिस्ट्रार डॉ. नाथ ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय में दाखिला प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार प्रोफेसरों की एडमिशन कमेटी के माध्यम से पूरी की जाती है। उन्होंने कहा कि यदि वैध दाखिला प्रक्रिया से बाहर किसी छात्र या बाहरी व्यक्ति द्वारा पैसे की मांग अथवा वसूली का प्रयास किया गया है, तो उसके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, आरोपों की वास्तविकता पुलिस जांच और संबंधित ऑडियो क्लिपिंग्स की फॉरेंसिक जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। जांच के निष्कर्ष के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।