प्रोफेसर पार्थंकर चौधरी असम राज्य वन्यजीव बोर्ड के सदस्य मनोनीत 

विशेष प्रतिनिधि शिलचर, 14 अगस्त:

असम विश्वविद्यालय के पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग के प्रोफेसर पार्थंकर चौधरी को असम राज्य वन्यजीव बोर्ड का सदस्य मनोनीत किया गया है। यह बोर्ड राज्य में वन्यजीव संरक्षण से संबंधित सर्वोच्च वैधानिक सलाहकार निकायों में से एक है। असम सरकार के वन एवं पर्यावरण विभाग के विशेष मुख्य सचिव, श्री एम. के. यादव के एक आदेश के अनुसार, प्रोफेसर चौधरी इस बोर्ड के सदस्य के रूप में कार्य करेंगे।

असम राज्य वन्यजीव बोर्ड राज्य सरकार को वन्यजीव संरक्षण, संरक्षित क्षेत्रों के प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण तथा अन्य पर्यावरणीय विषयों पर परामर्श देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस बोर्ड का गठन वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के अंतर्गत किया गया है।

बोर्ड के अध्यक्ष असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा हैं, जबकि वन एवं पर्यावरण मंत्री श्री जयंत मल्ला बरुआ इसके उपाध्यक्ष हैं। राज्य के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक (Chief Wildlife Warden) बोर्ड के सदस्य-सचिव के रूप में कार्य करते हैं। एक्स-ऑफिसियो सदस्य के रूप में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के अतिरिक्त, बोर्ड में असम विधानसभा के तीन सदस्य भी शामिल हैं। वे हैं असम विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र-शोधार्थी एवं विधायक, डॉ. मिलन दास (हैलाकांडी के विधायक), विधायक श्री ह्रीशिराज हजारिका एवं विधायक श्री विक्टर कुमार दास। अन्य सदस्यों में गौहाटी विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर, प्रो. परिमल चंद्र भट्टाचार्य; प्रसिद्ध संरक्षणवादी एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी, डॉ. अनवर उद्दीन चौधरी; तथा डॉ. पूर्णिमा देवी बर्मन शामिल हैं, जो पूर्वोत्तर भारत में ग्रेटर एडजुटेंट स्टॉर्क (हरगिला) के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध हैं।

अपनी नियुक्ति पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए प्रोफेसर चौधरी ने कहा, “इस महत्वपूर्ण दायित्व के लिए मुझ पर विश्वास जताया जाना मेरे लिए सम्मान और सौभाग्य की बात है। मैं विज्ञान-आधारित नीतिगत परामर्श के माध्यम से राज्य में वन्यजीव संरक्षण को सुदृढ़ बनाने, जैव विविधता की रक्षा करने तथा मानव और प्रकृति के बीच सतत सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने के प्रयासों में सार्थक योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध हूँ।”

बोर्ड का दायित्व सरकार को संरक्षित क्षेत्रों की पहचान एवं उनके प्रबंधन के संबंध में परामर्श देना, वन्यजीवों तथा पारिस्थितिकीय दृष्टि से महत्वपूर्ण पादप प्रजातियों के संरक्षण हेतु नीतियों के निर्माण में सहयोग करना तथा वन क्षेत्रों और उनके आसपास रहने वाले वन्यजीवों एवं स्वदेशी समुदायों के बीच सह-अस्तित्व को प्रोत्साहित करने के उपायों की अनुशंसा करना है। इसके अतिरिक्त, समय-समय पर सरकार द्वारा संदर्भित अन्य वन्यजीव एवं पर्यावरण संबंधी विषयों पर भी बोर्ड विशेषज्ञ सलाह प्रदान करता है।

प्रोफेसर चौधरी का यह मनोनयन बोर्ड की वैज्ञानिक विशेषज्ञता को और सुदृढ़ करेगा तथा असम में जैव विविधता संरक्षण और मानव–वन्यजीव अंतःक्रियाओं से जुड़ी बढ़ती चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

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