[टीएमपीके और सहयोगी संगठनों ने आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की; असम–अरुणाचल सड़क संपर्क प्रभावित, अनिश्चितकालीन नाकेबंदी की चेतावनी]
धेमाजी: असम–अरुणाचल प्रदेश सीमा पर तनाव बुधवार को उस समय और बढ़ गया, जब ताकाम मिसिंग पोरिन केबांग (टीएमपीके) सहित कई संगठनों ने असम के 11 ग्रामीणों पर कथित गोलीबारी के विरोध में 12 घंटे के धेमाजी बंद का आह्वान किया। बंद सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक रहा, जिसके कारण जिले में जनजीवन व्यापक रूप से प्रभावित हुआ और असम तथा अरुणाचल प्रदेश के बीच सड़क संपर्क भी बाधित रहा।
प्रदर्शनकारी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि गोलीबारी के लिए जिम्मेदार लोगों को तत्काल गिरफ्तार कर कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और तेज करते हुए अनिश्चितकालीन सड़क नाकेबंदी की जा सकती है।
यह विरोध 10 अगस्त को गोगामुख सर्किल के अंतर्गत मिंगमंग बादाती में हुई कथित गोलीबारी की घटना के दो दिन बाद हुआ है। भूमि विवाद को लेकर हुए टकराव के दौरान 11 असम निवासी गोली लगने से घायल हुए थे। सभी घायलों का इलाज डिब्रूगढ़ स्थित असम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एएमसीएच) में चल रहा है।
टीएमपीके के एक नेता ने कहा, “हम गोगामुख सर्किल के अंतर्गत बादाती के 11 निर्दोष ग्रामीणों पर अरुणाचल प्रदेश के लोअर सियांग स्थित हिमे बस्ती के उपद्रवियों द्वारा की गई बर्बर गोलीबारी की कड़ी निंदा करते हैं।”
संगठन ने गोलीबारी के लिए जिम्मेदार लोगों को तत्काल गिरफ्तार कर असम पुलिस को सौंपने तथा मामले में निष्पक्ष और त्वरित कानूनी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही, असम–अरुणाचल प्रदेश सीमा विवाद के स्थायी समाधान के लिए बातचीत की प्रक्रिया को तेज करने की मांग भी उठाई गई है।
विरोध का असर असम–अरुणाचल प्रदेश के प्रमुख प्रवेश मार्गों पर भी देखने को मिला। रिपोर्टों के अनुसार, टीएमपीके समर्थकों ने आर्थिक नाकेबंदी के तहत असम की ओर हॉलोंगी, बांदरदेवा और गुमटो प्रवेश द्वारों को अवरुद्ध किया। इससे वाहनों और लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई तथा यात्रियों से स्थिति सामान्य होने तक इन मार्गों से बचने की अपील की गई।
बताया गया है कि 10 अगस्त की घटना मिंगमंग बादाती में भूमि पर कथित कब्जे या अतिक्रमण के आरोपों को लेकर शुरू हुए विवाद के बाद हुई। दोनों राज्यों के सीमावर्ती निवासियों के बीच लंबे समय से आरोप-प्रत्यारोप के कारण क्षेत्र में तनाव बना हुआ था। स्थिति तब बिगड़ गई जब असम के ग्रामीण कथित तौर पर विवादित भूमि पर कब्जे का विरोध करने के लिए क्षेत्र में पहुंचे, जिसके बाद टकराव हुआ और गोलीबारी की घटना सामने आई।
इस बीच, असम के शिक्षा मंत्री डॉ. रानोज पेगू ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने उन्हें गोलीबारी की घटना की “उचित और निष्पक्ष जांच” का आश्वासन दिया है। पेगू के अनुसार, खांडू ने भरोसा दिलाया कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
दोनों नेताओं ने असम–अरुणाचल प्रदेश सीमा वार्ता को संयुक्त क्षेत्रीय समितियों के माध्यम से फिर से शुरू करने पर भी चर्चा की। पेगू ने बताया कि असम मंत्रिमंडल ने क्षेत्रीय समितियों का पुनर्गठन करते हुए उनमें नए मंत्रियों और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों को शामिल किया है।
पेगू ने लोगों से संयम बरतने की अपील करते हुए कहा कि लंबित सीमा विवादों के समाधान के लिए संवाद, आपसी समझ और सहयोग आवश्यक है। उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों से शांति और सौहार्द बनाए रखने का आग्रह किया।
ताजा हिंसा ने एक बार फिर दशकों पुराने असम–अरुणाचल प्रदेश सीमा विवाद को केंद्र में ला दिया है। दोनों राज्यों के बीच लगभग 804.1 किलोमीटर लंबी अंतरराज्यीय सीमा है, जिसके कई क्षेत्रों में वर्षों से सीमा और भूमि को लेकर विवाद चले आ रहे हैं।
15 जुलाई, 2022 को असम और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्रियों द्वारा हस्ताक्षरित नामसाई घोषणा को लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया था। समझौते के तहत शुरुआत में 123 गांवों से जुड़े विवादों को शामिल किया गया था, जिसे बाद की वार्ताओं और संयुक्त सत्यापन के बाद घटाकर 86 गांवों तक कर दिया गया।
11 ग्रामीणों के घायल होने और विरोध प्रदर्शनों के प्रमुख सीमा मार्गों तक फैलने के बाद अब प्रशासन के सामने स्थिति को और बिगड़ने से रोकने, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा सीमावर्ती समुदायों में विश्वास बहाल करने की बड़ी चुनौती है।
फिलहाल टीएमपीके और अन्य प्रदर्शनकारी संगठनों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि आरोपियों की गिरफ्तारी और निर्णायक कार्रवाई नहीं हुई, तो वे अपना आंदोलन और तेज करेंगे।