असम विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग एवं भारतीय ज्ञान परम्परा केंद्र (के संयुक्त तत्वावधान में तथा Mentor Ocean™ के संस्थापक डॉ. नील एम. गौतम के सहयोग से मंगलवार को “महामृत्युंजय विद्या™ के माध्यम से युवा नेतृत्व, मानसिक स्वास्थ्य एवं मानसिक क्षमता का विकास” विषयक एक दिवसीय अंतरविषयी संगोष्ठी एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन स्वप्ना देवी स्मृति भवन में किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजीव मोहन पंथ ने किया। उद्घाटन सत्र में संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. शांति पोखरेल, भारतीय ज्ञान परम्परा केंद्र के निदेशक प्रो. गंगाभूषण मोलंकल, कछार कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र के निदेशक पद्मश्री एवं रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित डॉ. रवि कन्नन आर., शिलचर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के मनोचिकित्सा विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. प्रसेंजित घोष, आसाम विश्वविद्यालय स्वास्थ्य केंद्र की चिकित्सा अधिकारी डॉ. दर्शना पाटोवा तथा Mentor Ocean™ के संस्थापक डॉ. नील एम. गौतम उपस्थित रहे। इस अवसर पर संस्कृत विभाग के प्रो. गोविंद शर्मा, विभाग के शोधार्थी, छात्र-छात्राएँ तथा विश्वविद्यालय के हिंदी, बंगला एवं मणिपुरी विभागों के शिक्षक एवं विद्यार्थी भी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। संस्कृत विभाग के शोधार्थियों ने अतिथियों का उत्तरीय एवं तिलक लगाकर स्वागत किया। स्वागत भाषण विभागाध्यक्ष प्रो. शांति पोखरेल ने दिया। कार्यक्रम की रूपरेखा एवं उद्देश्य डॉ. नील एम. गौतम ने प्रस्तुत किए, जबकि प्रो. गंगाभूषण मोलंकल ने भारतीय ज्ञान परम्परा की दृष्टि से इस प्रकार के अंतरविषयी कार्यक्रमों की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. राजीव मोहन पंथ ने कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धी युग में युवाओं के लिए मानसिक दृढ़ता, आत्मविश्वास, आत्म-जागरूकता, एकाग्रता और सकारात्मक चिंतन अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा और आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण का समन्वय विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व विकास तथा प्रभावी नेतृत्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
प्रथम तकनीकी सत्र में पद्मश्री एवं रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित डॉ. रवि कन्नन आर. ने “The Power of Purpose: Building Inner Strength and Resilience for Life’s Challenges” विषय पर व्याख्यान देते हुए जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए उद्देश्यपूर्ण जीवन, आंतरिक शक्ति एवं मानसिक लचीलापन विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
द्वितीय सत्र में प्रो. डॉ. प्रसेंजित घोष ने “Mastering Your Mind: Understanding Anxiety, Emotions and Mental Well-being in Student Life” विषय पर विद्यार्थियों के मानसिक तनाव, चिंता, भावनात्मक संतुलन एवं मानसिक स्वास्थ्य के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा की।
तृतीय सत्र में डॉ. दर्शना पाटोवा ने “Healthy Body, Healthy Mind: Daily Lifestyle Habits for Emotional Well-being” विषय पर स्वस्थ जीवनशैली एवं दैनिक आदतों के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाए रखने के उपायों पर प्रकाश डाला।
इसके पश्चात डॉ. नील एम. गौतम ने प्रतिभागियों को महामृत्युंजय विद्या™ का परिचय देते हुए भृगुगिरि परम्परा की विशेषताओं तथा इस विद्या के माध्यम से युवा नेतृत्व, मानसिक क्षमता, आत्मविकास एवं चेतना के विकास की संभावनाओं पर विस्तार से विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम में लगभग 40 विद्यार्थियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
आयोजकों के अनुसार भारतीय ज्ञान परम्परा और समकालीन वैज्ञानिक अनुसंधान के मध्य सार्थक संवाद स्थापित करने की दिशा में यह कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण पहल है। उनका कहना है कि महामृत्युंजय विद्या™ को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ समन्वित करते हुए किसी केंद्रीय विश्वविद्यालय में आयोजित इस प्रकार का यह विश्व का प्रथम अंतरविषयी शैक्षणिक कार्यक्रम है, जो भविष्य में मानसिक स्वास्थ्य, मानसिक क्षमता, नेतृत्व विकास तथा चेतना अध्ययन के क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और साक्ष्य-आधारित अकादमिक सहयोग के नए आयाम स्थापित करेगा।
Best Regards,
Madan Singhal
Patrakar & Sahityakar
Agarsen Siksha Sansthan
(inside Phulbari,Shillong Patty)
Silchar – 788001, Assam.