मोरान जातीय कर्मचारी शैक्षिक विकास मंच ने तीन सौ से अधिक निःशुल्क पाठ्य पुस्तकें वितरण किया।

दुमदुमा प्रेरणा भारती 27 जुलाई :– दुमदुमा में  मोरान जातीय कर्मचारी शैक्षिक विकास मंच ने भूमिपुत्र मोरान जनजाति के लगभग 300 से अधिक छात्र-छात्राओं को मुफ्त में पाठ्य पुस्तकें वितरण किया । दुमदुमा महाविद्यालय के “कल्लोल प्रेक्षागृह” में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता संगठन के अध्यक्ष भार्णव मोरान ने की। मंच के सचिव ज्ञान बरुआ ने कार्यक्रम का उद्देश्य बताते हुए कहा कि वर्ष 2005 से ही मोरान जनजाति के आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों के विद्यार्थियों को यह मदद दी जा रही है। जनजाति के विभिन्न सरकारी, गैर-सरकारी और कंपनियों में काम करने वाले नियमित कर्मचारियों ने आपस में पूंजी इकट्ठा करके हर साल इस तरह मुफ्त किताबें बांटने की शुरुआत की थी। इससे छात्रों को काफी राहत मिली है और वे पढ़ाई के लिए प्रेरित हुए हैं। उन्होंने आगे बताया कि शुरुआत में केवल उच्च माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्तर के छात्रों को ही निःशुल्क किताबें दी जाती थीं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से स्नातक और स्नातकोत्तर  के कई शाखाओं में अध्यन करने वाले  हर सेमेस्टर के छात्रों को भी मुफ्त पुस्तकें दी जा रही हैं। महासचिव ने छात्रों से जीवन में सफलता पाने के लिए जीवन को एक संघर्ष के रूप में स्वीकार करने का आह्वान किया। विशिष्ट समाजसेवी मुलेन्द्र मोरान ने दीप प्रज्वलित कर  कार्यक्रम का शुभारंभ किया और इसके बाद मंच के सलाहकारों ने दीप प्रज्वलित किया। “पाठ्यपुस्तक उपहार और अभिरोशन कार्यक्रम, उत्कृष्टता वर्ष: 2026” शीर्षक इस आयोजन में मोरान जनजाति के अनेक जातीय संगठनों के नेतृवृन्द और कई विशिष्ट शिक्षाविद उपस्थित होकर छात्रों को जीवन में सफलता के शिखर पर पहुंचने की प्रेरणा दी , साथ ही विज्ञान और तकनीक के इस वैश्वीकरण के दौर में अपने समाज को विश्व स्तर पर स्थापित करने के लिए छात्रों की सामाजिक जिम्मेदारी और कर्तव्य पर प्रेरणादायक वक्तव्य दिए। उपस्थित कई छात्र-छात्राओं ने कहा कि मोरान जातीय कर्मचारी शैक्षिक विकास मंच की ओर से हर वर्ष मोरान जनजाति के आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों के विद्यार्थियों को मुफ्त पाठ्य पुस्तकें प्रदान कर उनके जैसे परिवारों को काफी राहत दी जा रही है साथ ही ऐसे प्रेरणादायक कार्यक्रमों में विशिष्ट व्यक्तियों के दिशा-निर्देशों और सुझावों ने उन्हें जीवन में सफलता के शिखर पर पहुंचने के साथ-साथ जातीय और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति भी प्रेरित किया है।

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