180 वर्षों बाद असम में दुर्लभ पौधे ‘रुंगिया मास्टर्सी’ की पुनर खोज

शिलचर, 27 जुलाई: लगभग 180 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद असम में अत्यंत दुर्लभ वनस्पति प्रजाति ‘रुंगिया मास्टर्सी’ (Rungia mastersii) की पुनर्खोज हुई है। यह महत्वपूर्ण उपलब्धि असम विश्वविद्यालय के जीवन विज्ञान विभाग के शोधकर्ताओं ने हासिल की है, जिसने पूर्वोत्तर भारत के वनस्पति विज्ञान के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।

शोधकर्ता कंकन कुमार दास और प्रोफेसर देबज्योति भट्टाचार्य ने संयुक्त शोध के दौरान असम के दीमा हसाओ जिले के जाटिंगा पहाड़ी क्षेत्र में एक झरने के समीप नम एवं छायादार चट्टानों की दरारों से इस दुर्लभ पौधे की पहचान की। इस ऐतिहासिक खोज का विस्तृत विवरण वनस्पति विज्ञान की एक अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार, वर्ष 1845 में ब्रिटिश वनस्पतिशास्त्री जे. डब्ल्यू. मास्टर्स ने असम की सुंदर नदी के किनारे स्थित एक अज्ञात क्षेत्र से इस पौधे का पहला नमूना एकत्र किया था। इसके बाद लगभग 180 वर्षों तक दुनिया में कहीं भी इस प्रजाति का कोई जीवित पौधा नहीं मिला। यहाँ तक कि भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (Botanical Survey of India) के संग्रहालय में भी इसका केवल एक सूखा संरक्षित नमूना ही उपलब्ध था। इस कारण यह प्रजाति वनस्पतिशास्त्रियों के लिए एक रहस्यमय पौधा बन गई थी।

प्रोफेसर देबज्योति भट्टाचार्य ने बताया कि रुंगिया मास्टर्सी एकैंथेसी (Acanthaceae) कुल का एक झाड़ीदार पौधा है। इसकी ऊँचाई लगभग 60 से 110 सेंटीमीटर तक होती है और यह समुद्र तल से लगभग 900 से 1,250 मीटर की ऊँचाई पर उगता है। इसके फूलों का ऊपरी भाग हल्के हरे या सफेद रंग का होता है, जिस पर बैंगनी रंग के महीन धब्बे दिखाई देते हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, वर्तमान में इस पौधे का केवल एक ही प्राकृतिक आवास चिन्हित किया गया है, जहाँ लगभग 40 पौधे मौजूद हैं।

अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, इस प्रजाति को फिलहाल ‘नॉट इवैल्यूएटेड’ (Not Evaluated) श्रेणी में रखा गया है। हालांकि, शोधकर्ताओं का मानना है कि यह खोज इस बात का प्रमाण है कि पूर्वोत्तर भारत, विशेषकर असम के वन क्षेत्र, अब भी समृद्ध और अब तक काफी हद तक अन्वेषित न हुई जैव विविधता के विशाल भंडार हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस अत्यंत दुर्लभ पौधे को विलुप्त होने से बचाने के लिए तत्काल सरकारी स्तर पर विशेष निगरानी और प्रभावी संरक्षण उपाय अपनाए जाने की आवश्यकता है।

Sandip De

Leave a Comment