मथुरा से विशेष प्रतिनिधि द्वारा। दीनदयाल कामधेनु गौशाला समिति पिछले दो दशकों से समाज के गरीब एवं जरूरतमंद लोगों के उत्थान के लिए प्रशिक्षण, उपकरण, रोजगार, छात्रवृत्ति तथा अन्य आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने का कार्य कर रही है। समिति पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय सिद्धांतों के अनुरूप गौ संरक्षण, अनुसंधान एवं विकास तथा अपनी फार्मेसी के माध्यम से पंचगव्य उत्पादों के निर्माण को बढ़ावा दे रही है। मथुरा स्थित दीनदयाल धाम, फारेह में संचालित विभिन्न परियोजनाओं के माध्यम से समिति सैकड़ों लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रही है।

समिति द्वारा गौ संरक्षण, संवर्धन एवं देशी नस्ल सुधार के प्रति जनजागरण अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके साथ ही प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर गौ आधारित कृषि एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था के महत्व से लोगों को अवगत कराया जा रहा है। संस्था का लक्ष्य गौ अनुसंधान केंद्र एवं पशु चिकित्सालय की स्थापना कर पशुओं के उपचार में आयुर्वेदिक एवं होम्योपैथिक पद्धति को बढ़ावा देना है।
समिति गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी कार्यरत है। इसके अंतर्गत गोबर से जैविक खाद, मूर्तियां, दीपक, अगरबत्ती तथा अन्य उपयोगी उत्पादों के निर्माण का प्रशिक्षण दिया जाता है। किसानों एवं बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षित कर गांवों से शहरों की ओर पलायन रोकने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
समिति पंचगव्य आधारित आयुर्वेदिक औषधियों के निर्माण एवं प्रचार-प्रसार पर भी विशेष बल दे रही है। दूध, दही, घी, गोबर और गोमूत्र से तैयार औषधियों के महत्व की जानकारी प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से दी जाती है। साथ ही बैलों की पारंपरिक शक्ति का उपयोग खेती, चारा प्रबंधन, आटा पिसाई, जल निकासी तथा ऊर्जा उत्पादन जैसे कार्यों में करने के लिए भी किसानों को प्रेरित किया जा रहा है।

पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में संस्था वृक्षारोपण, वर्षा जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण तथा भूमि संरक्षण संबंधी कार्यक्रम संचालित कर रही है। इसके अलावा शिक्षित युवाओं को क्षेत्रीय वनौषधियों की पहचान, संरक्षण, मानकीकरण एवं भंडारण का प्रशिक्षण देने के साथ धार्मिक उद्यानों के विकास को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
आयुर्वेद एवं गौ आधारित चिकित्सा के विकास के उद्देश्य से समिति सेमिनार, सम्मेलन तथा प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने के साथ साहित्य एवं पत्रिकाओं का प्रकाशन भी करती है। संस्था का उद्देश्य पंचगव्य, पंचकर्म, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा पर आधारित अस्पताल, आयुर्वेदिक महाविद्यालय और योग प्रशिक्षण केंद्रों का संचालन करना तथा आर्थिक रूप से कमजोर रोगियों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना भी है। इसके अतिरिक्त असाध्य रोगों से पीड़ित मरीजों तथा दिव्यांगजनों के उपचार, प्रशिक्षण एवं आवासीय सुविधाओं के लिए भी समिति विभिन्न योजनाओं पर कार्य कर रही है।
उपरोक्त जानकारी संस्थान के प्रमुख कार्यकर्ता श्री ब्रजेश जी से प्राप्त हुई।